नवबिहार टाइम्स संवाददाता
देव (औरंगाबाद)। भगवान भास्कर की पावन नगरी देव में मकर संक्रांति के अवसर पर सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक समरसता और सेवा भावना का अनूठा दृश्य देखने को मिला। यहां दही-चूड़ा केवल भोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल और आपसी एकता का सशक्त माध्यम बनकर सामने आया।
मकर संक्रांति के अवसर पर 85 वर्षीय वैजनाथ प्रसाद ने युवाओं को एकत्र कर सबसे पहले भगवान सूर्य का विधिवत पूजन किया। इसके बाद दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया, जिसमें लोग ऊंच-नीच और भेदभाव भूलकर एक साथ बैठकर भोजन करते नजर आए। यह आयोजन सामाजिक समानता और भाईचारे का प्रतीक बना। इसके साथ ही देव मुख्य बाजार में एक स्टाल लगाकर जरूरतमंदों के बीच सेवा कार्य किया गया।
स्टाल के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को एक पैकेट में चूड़ा, तिलकुट और गुड़ वितरित किया गया। साथ ही बढ़ती ठंड को देखते हुए ठंड से राहत के लिए कंबल का भी वितरण किया गया, जिससे गरीब और असहाय लोगों को काफी सहारा मिला। वृद्धावस्था में भी वैजनाथ प्रसाद द्वारा किए गए इस सेवा कार्य ने सभी को प्रेरित किया। इस आयोजन में युवाओं में संजय, संतोष, राकेश और नंदलाल कुमार ने सक्रिय भूमिका निभाई और सेवा कार्य को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समाजसेवियों ने कहा कि सौर तीर्थ नगरी देव में मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक चेतना और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। ऐसे अवसर पर सेवा, सहयोग और सामाजिक एकता के कार्य समाज को नई दिशा देते हैं। मकर संक्रांति के इस आयोजन ने देव में सांस्कृतिक परंपरा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया और लोगों के बीच आपसी सद्भाव को और मजबूत किया।