रेल पटरी उखाड़कर अंग्रेजों का जताया था विरोध
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। मसौढ़ी अनुमंडल में कुल 23 स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजी हुकूमत के छक्के छुड़ा दिए थे जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों में कई महिला स्वतंत्रता सेनानियों ने भी बढ़-चढ़कर अपना अमूल्य योगदान दिया था। वैसे तो कई लोगों का काल कलवित हो चुका है, लेकिन अभी भी कुछ ऐसे भी क्रांतिकारी हैं जो आज भी जिंदा हैं। खास बात ये भी है कि स्वतंत्रता संघर्ष की पूरी कहानी उनके जेहन में आज भी ताजा हैं। लेकिन उम्र बढ़ाने के कारण कई स्वतंत्रता सेनानी का स्वास्थ्य है बेहद ही खराब है कई लोग बोल नहीं पा रहे हैं तो कई लोग सुन नहीं पा रहे हैं, फिर भी उनकी बुढी हड्डियों में आज भी हाथ में तिरंगा आते ही जोश और जुनून बढ जाता है। या यू कहे की जब भी 15 अगस्त या 26 जनवरी का दिन आता है उनके रग-रग में एक बार फिर से युवा बन जाते हैं।
गौरतलब है कि स्वतंत्रता सेनानी बरती देवी (90 वर्ष) पर्चे बांटा करती थीं। उस वक्त लोगों में देशभक्ति का जुनून पैदा करती थीं। ये देश वासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि वो आज भी जिंदा हैं। मसौढ़ी प्रखंड के नुरा पंचायत के डोरी पर गांव में अपने परिवार के साथ आजाद भारत की हवा में सांस लेते हुए उन्हें अच्छा लगता है। एक वक्त था जब अपने दिवगंत पति जमुना पासवान के साथ कंधे से कंधे मिलाकर अंग्रेजी हुकूमत को भगाने में तीन रात लगी रहती थी।
महिला स्वतंत्रता सेनानी बरती देवी ने कहा कि हम गांव-गांव में पर्चा बांटते थे, और रात में मीटिंग करते थे जब गांधी जी मसौढी आए थे तो उनके साथ कदम से कदम मिलाकर कई गांव में मीटिंग में भाग लेते थे, इसके अलावा उनके साथ दिल्ली गुजरात भी आंदोलन में गए थे।इसके अलावा उन्होंने बताया की जंतरमंतर पर भी हम लोग गए हैं। मसौढी के तिनेरी गांव के समीप रेल की पटरी उखाड़ने के लिए हमलोगों को 6 महीने की जेल जेल भी हुई थी। उसे दौरान तकरीबन 11 लोग पकड़े भी गए थे जहां हम लोगों को जेल हुई थी।