मिथिलेश मधुकर रचित कभी-कभी काव्य संग्रह का लोकार्पण
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। शहर के एक निजी होटल में रविवार को जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन औरंगाबाद के तत्वावधान में मिथिलेश मधुकर रचित कभी-कभी काव्य संग्रह का लोकार्पण किया गया। इसका लोकार्पण मुख्य अतिथि बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ, औरंगाबाद के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ सच्चिदानंद प्रेमी, भैरवनाथ पाठक, सुरेश चंद्र मिश्र, कमलेश पुण्यार्क, मनोज मिश्र पद्मनाभ, रामकृष्ण मिश्रा, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के पुस्तकालय मंत्री ई अशोक कुमार सिंह, मेहाल कुमार सिंह, संगीतानाथ ने किया।
मुख्य अतिथि डॉ अनिल सुलभ ने कहा कि मधुकर ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने सबके हित की बात की। केवल साहित्य लिख देने से ही कोई साहित्यकार नहीं हो सकता। उसके साहित्य को हर कोई पढे। आज के इस साहित्यिक संकट के दौर में व्यक्ति लिखना चाहता है लेकिन किस तरह लिखना है यह किसी को नहीं पता। साहित्यकार को ऐसा लिखना चाहिए जो जब कोई पाठक उसे पढ़े तो उसे अपना लगे। हिंदी भाषा की पठनीयता कमी नहीं है। मधुकर जी के काव्य रचना राष्ट्रीय चेतना, राष्ट्रीय नवजागरण, प्रेम, व्यंग्य और संपूर्ण साहित्य का द्योतक है। उन्होंने साहित्यकार के साथ-साथ समाज को जोड़ने का कार्य किया था।
कार्यक्रम का संचालन महामंत्री धनंजय जयपुरी द्वारा किया गया। मौके पर चंदन कुमार, विनय मामूली बुद्धि, नागेंद्र केसरी, डॉ संजीव रंजन, रामकिशोर सिंह, चंद्रशेखर साहू, लवकुश प्रसाद सिंह, श्रीराम राय ,रंजनी रंजन मिश्र, लालदेव प्रसाद, नीरज पाठक, संतोष मिश्रा, प्रो राजेंद्र सिंह, अशोक पांडेय, सुरेश विद्यार्थी सहित अन्य उपस्थित थे।