करोड़ों की रजिस्ट्री, फिर 4 करोड़ का ‘सिक्रेट’ संग्राम… क्या है इस स्कूल विवाद का सच?
विशाल वर्मा
गयाजी। शहर के समीर तकिया स्थित हंसराज पब्लिक स्कूल की 24 करोड़ 51 लाख रुपये में बिक्री के बाद चार करोड़ रुपये के कथित वित्तीय विवाद ने तूल पकड़ लिया है। स्कूल के पूर्व निदेशक मनीष रुखियार ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर खरीदने वाले पक्ष पर धोखाधड़ी, जालसाजी और अमानत में खयानत का गंभीर आरोप लगाया। वहीं, स्कूल प्रबंधन ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए इसे ब्लैकमेल और बदनाम करने की कोशिश करार दिया है।
मनीष रुखियार ने बताया कि उन्होंने करीब 22 वर्षों की मेहनत से हंसराज पब्लिक स्कूल को शैक्षणिक पहचान दिलाई थी। स्कूल की बिक्री के लिए सुमन कुमारी, विपिन कुमार और उनसे जुड़े लोगों के साथ 24 करोड़ 51 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। इसके लिए लिखित एग्रीमेंट के बाद 16 नवंबर 2025 को जिला निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री कराई गई।
विश्वास में लेकर लिए चार करोड़ रुपये
पूर्व निदेशक का आरोप है कि सौदे के दौरान करीब 60 प्रतिशत भुगतान मिलने के बाद खरीदने वाले पक्ष ने स्कूल संचालन और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए कार्यशील पूंजी की कमी बताकर चार करोड़ रुपये की मांग की। इसे छह महीने के अल्पकालिक ऋण के रूप में लेने और मई 2026 तक लौटाने का आश्वासन दिया गया। विश्वास में आकर उन्होंने एचडीएफसी बैंक खाते से आरटीजीएस और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के जरिए अलग-अलग किस्तों में संबंधित खातों में राशि भेजी। उनका दावा है कि बैंक स्टेटमेंट और लेन-देन के दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।
टीडीएस के 9.51 लाख भी बकाया होने का दावा
मनीष के अनुसार, बार-बार मांगने के बावजूद चार करोड़ रुपये वापस नहीं किए गए। उन्होंने बिक्री पर एक प्रतिशत टीडीएस के तहत निर्धारित 24.51 लाख रुपये में से 15 लाख रुपये जमा होने और शेष 9.51 लाख रुपये बकाया रहने का भी आरोप लगाया। रकम मांगने पर धमकी देने तथा पूर्व कर्मचारियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में सुरक्षित होने की बात कही। उन्होंने एफआईआर संख्या 7671/2026 का हवाला देते हुए बताया कि 30 दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। डीएसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाने के साथ बैंक लेन-देन, एग्रीमेंट, रजिस्ट्री और वीडियो साक्ष्यों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताया है। प्रबंधन का कहना है कि मामला पुलिस जांच के अधीन है, इसलिए फिलहाल टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्हें पुलिस और कानून की प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है तथा जांच में हरसंभव सहयोग किया जाएगा। प्रबंधन ने आरोप लगाया कि ब्लैकमेल करने और संस्थान को बदनाम करने के उद्देश्य से इस तरह की बातें कही जा रही हैं। फिलहाल मामले में पुलिस जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।