ओबरा में गरजे RAF के जवान: मॉक ड्रिल में दिखाया दंगाइयों और उपद्रवियों से निपटने का दमन
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। आपात स्थिति में पुलिस कितनी तेजी से मोर्चा संभाल सकती है और जवानों के बीच कितना बेहतर तालमेल है इसे परखने के लिए मंगलवार को डी/114 द्रुतकार्य बल (आरएएफ) द्वारा ओबरा थाना परिसर में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। उप कमांडेंट दुर्गा नंदन श्रीवास्तव की देखरेख में हुए इस अभ्यास में जवानों ने भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण लिया। इस अभियान में सहायक कमांडेंट प्रवीण कुमार, ओबरा थानाध्यक्ष नरोत्तम कुमार सहित अन्य बड़ी संख्या में जवानों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
मॉक ड्रिल के दौरान जवानों को अलग-अलग परिस्थितियां देकर उनकी प्रतिक्रिया क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और टीमवर्क का आकलन किया गया। जवानों ने निर्धारित स्थानों पर त्वरित तैनाती, अधिकारियों के निर्देशों पर कार्रवाई और सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल का अभ्यास किया। इस दौरान अचानक पैदा होने वाली परिस्थितियों में सूझबूझ और आपसी समन्वय के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
उप कमांडेंट दुर्गा नंदन श्रीवास्तव ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस की असली ताकत अनुशासन, सतर्कता और धैर्य है। प्रत्येक जवान को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए ताकि किसी भी चुनौती का सामना बिना घबराए किया जा सके।
उप कमांडेंट श्री श्रीवास्तव ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपात और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई की क्षमता परखना, आपात स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस और आरएएफ की संयुक्त कार्रवाई, भीड नियंत्रण संवेदनशील क्षेत्र की पहचान, घेराबंदी व सुरक्षित निकासी सहित विभिन्न प्रक्रियाओं का अभ्यास काराया गया। अभ्यास में 114वीं वाहिनी के साथ पुलिस बल के जवान भी भाग लिया।
इस दौरान निर्धारित मानक संचालन प्रकिया के तहत जवानों ने अलग-अलग परिस्थितियों में तत्काल प्रतिक्रिया देने का अभ्यास किया। विशेष परिस्थितियों में बलों के बीच बेहतर समन्वय एवं संचार व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। अभ्यास के दौरान किसी आपात स्थिति में घटनास्थनल तक तेजी से पहुंचने, स्थिति का आकलन करने, क्षेत्र को सुरक्षित करने और आवश्यक कर्रवाई के बाद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।
उन्होंने बताया कि नियमित तौर से किये जाने वाले ऐसे अभ्यास से आपात परिस्थितियों में बलों की तत्परता बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आवश्कता पड़ने पर विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई को प्रभावी बनाने में भी यह उपयोगी।