नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू द्वारा व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद में अस्थायी वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर (VWDC) का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम अनिल कुमार सिन्हा (निरीक्षी न्यायाधीश, व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद) की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरुण कुमार सहित कई जिला जज, न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता एवं सैकड़ों की संख्या में विधिज्ञ उपस्थित रहे।

अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने जानकारी देते हुए बताया कि यह केंद्र संवेदनशील, कमजोर, असुरक्षित, मानसिक रूप से प्रभावित तथा दिव्यांग गवाहों को सुरक्षित वातावरण में गवाही देने की सुविधा प्रदान करेगा। इसे वीडियो गवाही केंद्र के रूप में भी जाना जाएगा, जहां गवाह बिना किसी भय या दबाव के अपनी बात रख सकेंगे।
यह पहल सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों एवं गवाह संरक्षण योजना 2018 के अनुपालन में शुरू की गई है। इसका उद्देश्य गवाहों को डराने-धमकाने की घटनाओं में कमी लाना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी व सुरक्षित बनाना है।
ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी सह न्यायिक पदाधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि इस केंद्र की प्रमुख विशेषताओं में गवाहों को आरोपी के आमने-सामने आए बिना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही देने की सुविधा, सुरक्षित और अलग कक्ष, तथा विशेषकर बच्चों एवं यौन उत्पीड़न पीड़ितों के लिए अनुकूल वातावरण शामिल है।
उन्होंने कहा कि इस केंद्र से यह सुनिश्चित होगा कि गवाह न्याय प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का मानसिक आघात न झेलें और बिना भय के सच्ची गवाही दे सकें।
वीडब्ल्यूडीसी के उद्घाटन पर अधिवक्ताओं ने प्रसन्नता व्यक्त की। यह अस्थायी केंद्र 31 मार्च 2026 से कार्य करना शुरू करेगा। इसका संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद के अंतर्गत सचिव न्यायाधीश तान्या पटेल की देखरेख में किया जाएगा।