नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। कांग्रेस आज विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। लगातार मिल रही चुनावी हार के कारण कांग्रेस नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। उन्हें यह तक समझ नहीं आ रहा कि क्या बोलना है और क्या बोल रहे हैं। यह बातें औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने बुधवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में कहीं।
सुशील कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शरजील इमाम के समर्थन में छात्र संगठनों द्वारा लगाए गए राष्ट्रविरोधी नारों का समर्थन कर कांग्रेस नेताओं ने निंदनीय कार्य किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले भी देश में हुई आतंकी घटनाओं पर नरम रुख अपनाती रही है, जो अब उसकी आदत बन चुकी है।
पूर्व सांसद ने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति से भारत के राष्ट्रपति की तुलना करना और भारत के प्रधानमंत्री के अमेरिका द्वारा अपहरण किए जाने जैसे बयान देना कांग्रेस नेताओं के बौद्धिक दिवालियापन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को यह समझना चाहिए कि भारत आज विश्व की प्रमुख वैश्विक शक्तियों में शामिल है और जापान को पीछे छोड़ते हुए चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। वर्ष 2026 के अंत तक भारत के तीसरी आर्थिक शक्ति बनने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस का प्रदर्शन अब तक का सबसे खराब रहा है, जिससे पार्टी के नेता हताश और विचलित हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनाव में कांग्रेस की स्थिति पहले से ही कमजोर बनी हुई है। धान खरीदारी में किसानों को हो रही परेशानियों पर सुशील कुमार सिंह ने कहा कि इस वर्ष चावल का भंडार आवश्यकता से अधिक है, इसी कारण सरकार ने खरीद लक्ष्य कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उन्होंने सहकारिता मंत्री से बातचीत कर भारत सरकार को पत्र भेजने का आग्रह किया है, ताकि खरीद लक्ष्य बढ़ाया जा सके।
साथ ही उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर भी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। कई पैक्स ऐसे हैं, जिन्हें मिला खरीद लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी व्यवस्था की लापरवाही के कारण असिंचित पंचायतों का खरीद लक्ष्य बढ़ा दिया गया है, जबकि सिंचित पंचायतों का लक्ष्य घटा दिया गया है। इसके अलावा डिफाल्टर पैक्स से जुड़े किसानों को पास की पंचायत में टैग करने के बजाय 20 से 25 किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है।
इस संबंध में उन्होंने जिला प्रशासन को भी जानकारी दी है, जिसके बाद कुछ सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पारदर्शी तरीके से धान की खरीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है। उत्तर कोयल नहर परियोजना को लेकर पूर्व सांसद ने कहा कि इस वर्ष बारिश शुरू होने से पहले कुटकू डैम में लोहे का फाटक लगाए जाने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ अनुकूल रहा तो किसानों का वर्षों पुराना सपना साकार होगा।
उन्होंने बताया कि झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस शामिल हैं, इसके बावजूद भारत सरकार इस परियोजना में गहरी रुचि ले रही है और झारखंड सरकार ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि यह देश में पहली बार हो रहा है जब एक ही जमीन का दो बार मुआवजा दिया जा रहा है। इससे लगभग 50 लाख किसान प्रभावित हो रहे हैं और उनके हित में यह निर्णय लिया गया है। किसानों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया लगातार चल रही है।
औरंगाबाद बाईपास निर्माण को लेकर सुशील कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 2026 में निर्माण कार्य शुरू होने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पहले तैयार प्रस्ताव में भूमि अधिग्रहण की लागत अधिक होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने उसे रोक दिया था। अब जो नया प्रस्ताव तैयार किया गया है, वह खैरी मोड़ से शुरू होकर भरकुर गांव के पास समाप्त होगा। लगभग 19 किलोमीटर लंबा यह बाईपास मंजुराही, रायपुरा, भरथौली, पवई समेत कई गांवों से होकर गुजरेगा। बाईपास के निर्माण से औरंगाबाद शहर को जाम की समस्या से राहत मिलेगी।
प्रेस वार्ता में शिक्षाविद सूर्यपत सिंह, भारतीय जनता पार्टी नेता रविन्द्र शर्मा, मोनिंद्र कुमार, जिला प्रवक्ता उदय प्रताप सिंह, पूर्व उप प्रमुख मनीष पाठक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।