नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिला उपभोक्ता अदालत औरंगाबाद के आदेश से एक व्यवसायी को लंबे समय से लंबित खाने का बकाया भुगतान प्राप्त हुआ है। यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले की जानकारी अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने दी।
बताया गया कि अनिल कुमार, जो नाबार्ड रूरल मार्ट में परियोजना प्रभारी हैं, अपने जीविकोपार्जन के लिए जिला परिषद के सामने एक दुकान का संचालन करते हैं। उनकी दुकान से उत्पाद मद्य निषेध विभाग के निरीक्षक चंदन कुमार और लेखा से जुड़े नीरज कुमार द्वारा मौखिक आदेश पर विभिन्न तिथियों में कुल 19 बार अपने अधिकारियों के लिए भोजन मंगवाया गया। इस भोजन का कुल मूल्य 26 हजार 840 रुपये था।
अनिल कुमार का आरोप है कि भोजन आपूर्ति के बाद लगभग एक वर्ष तक संबंधित अधिकारियों द्वारा भुगतान में लगातार टालमटोल की जाती रही, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इसके बाद अनिल कुमार ने 2 प्रतिशत मासिक ब्याज की दर से कुल 33 हजार 281 रुपये की मांग करते हुए 29 मार्च 2025 को वकालतन नोटिस भेजा, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। न्याय और बकाया राशि की वसूली के लिए अंततः अनिल कुमार ने जिला उपभोक्ता अदालत की शरण ली।
उपभोक्ता अदालत से नोटिस मिलने के बाद उत्पाद विभाग ने 26 हजार 840 रुपये का चेक जिला उपभोक्ता अदालत में जमा किया। सोमवार को जिला उपभोक्ता अदालत के सदस्य बद्री नारायण सिंह ने यह चेक पीड़ित अनिल कुमार को प्रदान किया। इस निर्णय के बाद व्यवसायियों के बीच यह मामला व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।