नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
गया। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 फरवरी से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन अभियान की तैयारियों का गेट्स फाउंडेशन द्वारा जायजा लिया गया। इस क्रम में गेट्स फाउंडेशन के डॉ माणिक ने सिविल सर्जन डॉ राजाराम प्रसाद और जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ एमई हक के साथ दवा भंडारण, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, माइक्रोप्लानिंग सहित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की।
इसके बाद सिविल सर्जन और जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात कर अभियान की अद्यतन तैयारियों की जानकारी दी गई। बैठक में भारत सरकार के इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के साथ समन्वय और सहयोग पर चर्चा हुई। इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के एसएमओ डॉ कुणाल, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ राजीव अंबष्ट, यूनिसेफ एसएमसी अजय चेरोबिम, पीरामल स्वास्थ्य के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर अभिषेक सिंह, प्रोग्राम लीडर विजय कुमार और डिस्ट्रिक्ट मैनेजर राजेश गिरि उपस्थित रहे।
डॉ माणिक ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान बेलागंज के नाइट ब्लड सर्वे साइट के अलावा बोधगया और डोभी में स्वास्थ्य अधिकारियों से मुलाकात कर अभियान की प्रगति और चुनौतियों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए आइवरमेक्टिन, डीईसी और अल्बेंडाजोल तीनों दवाओं का सेवन आवश्यक है। आमजन में दवा सेवन के प्रति सकारात्मक समझ विकसित करने के लिए मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार पर भी बल दिया गया है।
इधर, बुधवार को सर्वजन दवा सेवन अभियान आइडीए के तहत स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन सिविल सर्जन ने कहा कि फाइलेरिया जिसे आम भाषा में हाथीपांव कहा जाता है, लाइलाज बीमारी है और इससे अपंगता हो सकती है। इसका एकमात्र उपाय नियमित और सही तरीके से दवा सेवन है। उन्होंने लोगों से भयमुक्त होकर दवा खाने की अपील की और सभी विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया। साथ ही प्रखंड स्तर पर शीघ्र प्रशिक्षण आयोजित कर दवा सेवन की तकनीकी जानकारी देने को कहा।
डीपीएम नीलेश कुमार ने आईईसी सामग्री के उठाव को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। डॉ एमई हक ने बताया कि जिला स्तर पर मानपुर और परैया प्रखंड को छोड़कर सभी प्रखंडों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य पदाधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। अब आशा कार्यकर्ताओं का प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण कराया जाएगा। इसके साथ ही आईसीडीएस, पंचायती राज, शिक्षा विभाग और आपूर्ति विभाग के कर्मियों से चर्चा कर अधिक से अधिक लोगों तक दवा सेवन का संदेश पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।