राष्ट्रीय ध्वज को बनाने के लिए खादी कारीगर व श्रमिकों ने लगभग 3500 घंटे का किया अतिरिक्त कार्य
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
भुज (गुजरात)। गुजरात के भुज जिले के ग्रेट रन ऑफ कच्छ के धोरडो में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम मंत्रालय की ओर से सोमवार को देशभक्ति एवं स्वदेशी शक्ति का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महात्मा गांधी के विरासत खादी से निर्मित दुनिया का सबसे विशाल स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान और गौरव के साथ प्रदर्शित किया गया। यह ध्वज 225 फीट लंबा, 150 फीट चौड़ा है। इसका भार लगभग 1400 किलोग्राम है। इस स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज को बनाने के लिए खादी कारीगर व श्रमिकों ने लगभग 3500 घंटे का अतिरिक्त कार्य किया है। वहीं सफेद नमक के रेगिस्तान के ऊपर आलोकित यह ऐतिहासिक तिरंगा राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी भावना एवं भारत की सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रतीक बना।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार रहे। इस मौके पर मुख्य अतिथि ने ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत गुजरात के कारीगरों को उपकरण एवं टूलकिट का वितरण किया। बता दें कि 26 जनवरी 2026 को वर्ष 2001 में आए भुज भूकंप के 25 वर्ष पूर्ण हुए। इस दौरान भूकंप से प्रभावित नागरिकों का स्मरण करते हुए कच्छ की अदम्य जिजीविषा और विकास की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया गया।

मौके पर केवाइसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि गणतंंत्र दिवस के अवसर पर कच्छ के रन में दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगे का भव्य प्रदर्शन किया जाना राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। कार्यक्रम ऑपरेशन सिदूर के वीर जवानों को समर्पित है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी नेतृत्व को श्रेय देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में खादी आंदोलन को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जो नया, सुरक्षित और सुव्यवस्थित भुज खड़ा है वह किसी संयोग का परिणाम नहीं बल्कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में उनके दूरदर्शी नेतृत्व, अथक परिश्रम और विकासपरक सोच का प्रतिफल है। भुज को भविष्य के लिए एक आत्मनिर्भर और नियोजित नगर के रूप में विकसित किया गया। श्री कुमार ने कहा कि बीते 11 वर्षो से केवीआइसी ने उत्पादन, विपणन, डिजाइन और तकनीक के क्षेत्र में बड़े सुधार किए हैं जिसका व्यापक असर हुआ है। बता दें कि खादी ग्रामोद्योग का कारोबार एक लाख 70 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। वहीं दो करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।