हरिहरगंज से परवा मोड़ तक फोर लेन सड़क निर्माण परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। आज बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग-98 पर हरिहरगंज से परवा मोड़ तक फोर लेन सड़क निर्माण परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा तथा तथा सदर डीएसएलआर श्वेतांक लाल उपस्थित थे।
समीक्षा के क्रम में बताया गया कि यह परियोजना किमी 23.284 (हरिहरगंज) से किमी 57.049 (परवा मोड़ के समीप) तक लगभग 33.765 किलोमीटर लंबाई में फोर लेन सड़क निर्माण से संबंधित है, जिसका क्रियान्वयन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), पीआईयू डाल्टनगंज द्वारा कराया जा रहा है।

बैठक में परियोजना की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि अधिकांश भाग में सड़क निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा शेष कार्य तेजी से प्रगति पर है। यह परियोजना बिहार के औरंगाबाद एवं झारखंड के पलामू जिलों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करने के साथ-साथ NH-02 (औरंगाबाद) तथा NH-75 (डाल्टनगंज) के बीच महत्वपूर्ण फीडर मार्ग के रूप में कार्य करेगी। परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ-साथ व्यापारिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में भूमि अधिग्रहण से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। औरंगाबाद जिले में अधिग्रहित भूमि के कुछ अंश से संबंधित 3G अवार्ड की प्रक्रिया लंबित होने की जानकारी दी गई। इस संबंध में बताया गया कि संबंधित भूमि के मिसिंग प्लॉट्स की प्रकृति की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है तथा जांच प्रक्रिया प्रगति पर है। समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इसके अतिरिक्त संडा एवं महाराजगंज गांव से संबंधित 0.17 हेक्टेयर अतिरिक्त अधिग्रहित भूमि के मामले में आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए 3D अधिसूचना के प्रकाशन हेतु भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को पत्र प्रेषित किया गया है।
बैठक में मुख्य सचिव द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े शेष मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करते हुए परियोजना के शेष कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराया जाए। साथ ही संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर निर्माण कार्य में आने वाली बाधाओं का त्वरित समाधान करने तथा परियोजना की नियमित समीक्षा करने पर बल दिया गया।