नवबिहार टाइम्स संवाददाता
औरंगाबाद। औरंगाबाद जिले में यक्ष्मा (टीबी) उन्मूलन के लिए किए गए प्रभावी और कारगर प्रयासों के फलस्वरूप जिले की कई पंचायतें पूरी तरह से यक्ष्मा मुक्त घोषित की गई हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को देखते हुए औरंगाबाद के अपर उपाधीक्षक सह सहायक अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रवि रंजन को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय यक्ष्मा प्रभाग द्वारा सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें विश्व यक्ष्मा दिवस समारोह के दौरान सोमवार को नई दिल्ली में प्रदान किया जाएगा।
औरंगाबाद जिले में स्वास्थ्य विभाग के अथक प्रयासों से कई पंचायतों को यक्ष्मा मुक्त घोषित किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से औरंगाबाद सदर प्रखंड की परसदीह पंचायत, देव की हसौली पंचायत, नवीनगर की जयहिंद तेंदुआ पंचायत तथा ओबरा सदर पंचायत शामिल हैं। केंद्रीय टीबी डिवीजन ने इन पंचायतों की स्थिति की पुष्टि करते हुए उन्हें यक्ष्मा मुक्त घोषित किया है। यह उपलब्धि न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में जिले की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल पेश करती है। औरंगाबाद जिले में यक्ष्मा उन्मूलन के इस मिशन को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा पदाधिकारी और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर काम किया।
डॉ. रवि रंजन के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने न केवल रोगियों की पहचान की, बल्कि उन्हें समुचित चिकित्सा सहायता और परामर्श भी प्रदान किया। इसके अलावा, समुदाय में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को टीबी के लक्षण, रोकथाम और उपचार के प्रति सचेत किया गया। डॉ. रवि रंजन को यह सम्मान मिलने की घोषणा के बाद औरंगाबाद जिले में खुशी का माहौल है। जिला नागरिक परिषद समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने डॉ. रवि रंजन को बधाई दी है। परिषद के सदस्यों ने कहा कि उनके प्रयासों से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिली है और टीबी के खिलाफ जंग में यह एक ऐतिहासिक सफलता है।
सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले विश्व यक्ष्मा दिवस समारोह में केंद्रीय यक्ष्मा प्रभाग द्वारा डॉ. रवि रंजन को सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे। डॉ. रवि रंजन के प्रयासों से औरंगाबाद जिला देशभर में एक मिसाल बन गया है और यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का प्रमाण है, बल्कि जिले के स्वास्थ्य तंत्र की सुदृढ़ता को भी दर्शाता है।