बिहार के सीमांचल से होगी घुसपैठियों को भगाने की शुरुआत
अररिया में सशस्त्र सीमा बल की परियोजनाओं का लोकार्पण
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
नयी दिल्ली/पटना/अररिया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरूवार को बिहार के अररिया में सशस्त्र सीमा बल के जवानों से संवाद किया। उन्होंने बॉर्डर आउट पोस्ट लेटी और इंदरवा का उद्घाटन किया तथा सशस्त्र सीमा बल की विभिन्न परियोजनाओं का ई-लोकार्पण और ई-शिलान्यास किया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक, सीमा प्रबंधन के सचिव, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और सशस्त्र सीमा बल के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे। मंत्री ने जवानों के साथ भोजन भी किया।
अमित शाह ने कहा कि लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत से जवानों की सुविधाओं के लिए विभिन्न कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि 2014 से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए संवेदनापूर्ण कार्ययोजना लागू की है। भारत-नेपाल सीमा सड़क योजना के तहत 554 किलोमीटर सीमा सड़क स्वीकृत हुई है, जिसके 18 खंडों में से 14 पर कार्य पूरा हो चुका है। 2468 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि में से 2336 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सड़क निर्माण से निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि बिहार को घुसपैठियों से मुक्त करना चुनावी वादा ही नहीं, सरकार का संकल्प है और इसकी शुरुआत सीमांचल से होगी। सीमा के 10 किलोमीटर के भीतर अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। घुसपैठ से होने वाला जनसांख्यिकी परिवर्तन संस्कृति, इतिहास और भूगोल के लिए खतरनाक बताया गया। पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड को इससे सर्वाधिक प्रभावित राज्य बताते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार बनने पर सीमा पर बाड़ का कार्य पूरा कर घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा।
अमित शाह ने सशस्त्र सीमा बल के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि इसे पहले विशेष सेवा ब्यूरो के नाम से जाना जाता था। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान नेपाल-भूटान सीमा की सुरक्षा का दायित्व मिला। 2001 से 1751 किलोमीटर भारत-नेपाल खुली सीमा और 2004 से 699 किलोमीटर भूटान सीमा की सुरक्षा बल के जिम्मे है। उन्होंने स्मगलिंग, नारकोटिक्स और अन्य अवैध गतिविधियों पर सतर्क निगरानी तथा मानक कार्यप्रणाली तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वायब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-1 और 2 के माध्यम से सीमावर्ती गांवों के विकास का लक्ष्य बताया गया। कार्यक्रम में वीर सावरकर की पुण्यतिथि का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का प्रखर विचारक और क्रांतिकारी बताया, जिन्होंने 1857 के आंदोलन को स्वतंत्रता संग्राम की संज्ञा दी।