नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
रांची। झारखंड नगर निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे इच्छुक प्रतिनिधियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि उम्मीदवार बनने की क्या अर्हता है। छोटी-सी चूक भी नामांकन खारिज होने की वजह बन सकती है। ऐसे में समय रहते दस्तावेज और तकनीकी खामियों को सुधार लेना ही समझदारी है। किसी वार्ड या निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए अभ्यर्थी का नाम संबंधित नगरपालिका क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है। वार्ड पार्षद/सदस्य पद के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय है। महापौर या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की आयु कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए और उनका नाम नगरपालिका क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होनी चाहिए। निर्वाचन वर्ष से ठीक पहले के वित्तीय वर्ष के अंत तक नगरपालिका के सभी बकाया करों का भुगतान किया होना चाहिए।
चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी की दो से अधिक जीवित संतान नहीं होनी चाहिए। हालांकि, झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के अनुसार, यदि अधिनियम के लागू होने के एक वर्ष (9 फरवरी 2013) तक किसी व्यक्ति को दो से अधिक संतान थी, तो वह इस आधार पर अयोग्य नहीं माना जाएगा। वार्ड पार्षद या सदस्य पद के लिए अभ्यर्थी का प्रस्तावक और समर्थक उसी वार्ड का मतदाता होना अनिवार्य है। महापौर या अध्यक्ष पद के लिए अभ्यर्थी, प्रस्तावक और समर्थक नगरपालिका क्षेत्र के किसी भी वार्ड का मतदाता हो सकता है। जो व्यक्ति स्वयं मतदाता के रूप में अयोग्य है, वह किसी भी उम्मीदवार का प्रस्तावक या समर्थक नहीं बन सकता।
अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को नामांकन शुल्क का आधा भुगतान करना होगा। आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार यदि अनारक्षित सीट से भी चुनाव लड़ता है, तब भी उसे आधा शुल्क ही देना होगा। यदि कोई अभ्यर्थी एक ही पद के लिए एक से अधिक नामांकन पत्र दाखिल करता है तो शुल्क एक बार ही देना होगा, लेकिन एक से अधिक पदों के लिए चुनाव लड़ने पर प्रत्येक पद का अलग-अलग शुल्क देना अनिवार्य होगा।