लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन स्कूल में मना भव्य रजत जयंती समारोह
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। “संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है। विद्यालय किसी एक धर्म, जाति या संप्रदाय का नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने वाला संस्थान होता है।” यह बातें राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कही। वे रविवार को ओबरा प्रखंड के भरूब रोड स्थित लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन स्कूल में रजत जयंती समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। जहां समारोह अत्यंत भव्यता, गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। यह ऐतिहासिक अवसर शिक्षा, संस्कार, संस्कृति और सामाजिक विकास के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बना।

समारोह में औरंगाबाद जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने विद्यालय की सराहना करते हुए कहा, “विद्यालय केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक अनुभव होता है। यहाँ आकर मुझे अपने विद्यालय जीवन की स्मृतियाँ ताज़ा हो गईं। लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन स्कूल औरंगाबाद एवं ओबरा क्षेत्र का एक अत्यंत प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है।” ओबरा विधायक प्रकाश चंद्र ने विद्यालय को औरंगाबाद एवं ओबरा क्षेत्र की शैक्षणिक धरोहर बताया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भरुण और कझवां गाँव को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण शीघ्र कराया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को विद्यालय आने-जाने में सुविधा मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी आवागमन में लाभ होगा। दाउदनगर के एसडीएम अमित रंजन ने अपने वक्तव्य में कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों से भी सशक्त किया जाना चाहिए।

विद्यालय के चेयरमैन डॉ. धनंजय कुमार ने कहा कि बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय निरंतर सफलता की नई ऊँचाइयों को छू रहा है और अभिभावकों व विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने की दिशा में सतत अग्रसर है।

विद्यालय के निदेशक सर्वेश कुमार ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में आना मेरे लिए कोई व्यवसाय नहीं, बल्कि एक संकल्प और मिशन है। अपने क्षेत्र के बच्चों को शिक्षित करने के लिए जो भी करना पड़े, मैं उसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करूंगा।” उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय अब सभी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है, जिससे विद्यार्थियों को समयानुकूल, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

समारोह के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। ‘शहीद’ नाटक एवं कजरी नृत्य सहित विभिन्न प्रस्तुतियों को खूब सराहना मिली। साथ ही आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में 200 से अधिक मॉडलों ने सभी को प्रभावित किया, जिन्हें विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत और लगन से तैयार किया था। दशरथ मांझी द्वारा पहाड़ काटकर बनाई गई घाटी का मॉडल तथा मिनी एयर कंडीशनर विशेष रूप से प्रेरणादायक और आकर्षण का केंद्र रहे।

शिक्षा में अनुशासन और निरंतरता को प्रोत्साहित करते हुए उन अभिभावकों को सम्मानित किया गया, जिनके बच्चों ने पूरे शैक्षणिक सत्र में शत-प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखी तथा अनुशासन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके साथ ही MAT (Mental Ability Test) में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। मंच संचालन लगभग 20 विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय के शिक्षक संजीत कुमार के साथ संयुक्त रूप से किया गया, जो अत्यंत सराहनीय रहा।