नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा घोषित मैट्रिक परीक्षा परिणाम में इस बार भी ग्रामीण प्रतिभाओं ने शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। संसाधनों की कमी के बावजूद दो छात्रों प्रीतम कुमार और आनंद कुमार ने जिला टॉपर में स्थान हासिल कर मिसाल पेश की है।
मसौढ़ी के भैंसवां गांव निवासी प्रीतम कुमार ने 479 अंक प्राप्त कर जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। प्रीतम एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता धनेश्वर प्रसाद और माता गीता देवी सूरत की एक साड़ी फैक्ट्री में पेंटिंग का काम करते हैं। माता-पिता के दूर रहने के बावजूद प्रीतम ने अपने दादा-दादी के पास रहकर पढ़ाई की और जगपुरा उच्च माध्यमिक हाई स्कूल का छात्र रहते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
प्रीतम की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने विज्ञान विषय में 100 में 100 अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने बताया कि उनका सपना एक शिक्षक बनने का है। वे इंटरमीडिएट में विज्ञान विषय लेकर आगे की पढ़ाई करेंगे और समाज को शिक्षित करने में अपना योगदान देना चाहते हैं।
इसी कड़ी में पुनपुन स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय में पढ़ाई कर रहे आनंद कुमार ने भी जिले में टॉप-3 में स्थान बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। आनंद नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड के बड़े निशियां गांव के निवासी हैं। उनके पिता उपेंद्र राम पट्टे पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
आनंद की इस सफलता पर उनकी माता संगीता कुमारी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनका बेटा आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनेगा। आनंद ने भी अपने लक्ष्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर अपने सपनों को जरूर पूरा करेंगे।
दोनों छात्रों की सफलता पर उनके शिक्षकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने खुशी जताई है। आनंद के शिक्षक शैलेंद्र दुबे ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की, वहीं प्रीतम के शिक्षक एस.के. राय ने इसे गर्व का क्षण बताया।
पंचायत के मुखिया साधु पासवान ने प्रीतम की सफलता पर खुशी जताते हुए उनकी आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की। इस घोषणा से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने मुखिया के इस कदम की सराहना की।
प्रीतम और आनंद की यह सफलता न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी मेहनत और लगन यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।