प्रधानाचार्यों और शिक्षाविदों का चार दिवसीय सम्मेलन प्रारंभ
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। केन्द्र सरकार के उद्देश्यों के अनुरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी रूप से कार्यान्वयन को लेकर औरंगाबाद में विभिन्न राज्यों के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्रधानाचार्यों और शिक्षाविदों का चार दिवसीय सम्मेलन प्रारंभ हो गया है। इस सम्मेलन में भारती शिक्षा समिति के प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ने संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद हमलोगों ने इसे प्रारंभ किया और कई प्रकार के कार्यशाला विभिन्न स्तरों पर किया गया। संरचना को आत्मसात किए। सरकार की जो गति है उससे कदम को मिलाकर हम भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति की गति को आगे बढ़ा रहे हैं। अभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्यवन वर्ष चल रहा है। 2033 तक यह पूर्ण रूप में आ जाएगा। धीरे-धीरे यह लागू हो रहा है। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्यवन पर फोकस करना है और इसका थीम भी समाज निर्माण राष्ट्र निर्माण है।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के अंतर्गत विद्यालयों में माधव सेतु लाइब्रेरी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित अधिगम क्षेत्र (लर्निंग ज़ोन) का उद्घाटन भी किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों में स्वाध्याय, अनुसंधान एवं मूल्याधारित शिक्षा को बल मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष (100 वर्ष) के अवसर पर शिक्षा के माध्यम से समाज परिवर्तन, राष्ट्र निर्माण, संस्कारयुक्त नागरिक निर्माण तथा विकासोन्मुख सामाजिक चेतना पर विशेष विमर्श किया जाएगा।
सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र में उत्तर-पूर्व क्षेत्र के कार्यवाहक डॉ. मोहन जी, संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री ख्याली राम, पूर्व राज्यसभा सांसद गोपाल नारायण सिंह, औरंगाबाद विद्यालय के सचिव बजरंगी प्रसाद, प्रांत प्रचारक उमेश रंजन तथा औरंगाबाद विद्यालय के प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त ब्रह्मदेव जी, गंगा चौधरी, लाल बाबू, सतीश कुमार सिंह, वीरेंद्र कुमार, परमेश्वर प्रसाद यादव, रामचंद्र आर्य सहित अन्य की गरिमामयी उपस्थिति रही।
पूर्व राज्यसभा सांसद गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि संस्कारों के माध्यम से प्राप्त ज्ञान ही राष्ट्र को सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है, इसलिए हमें भी समय के साथ चलकर समाज के हित में कार्य करना होगा। समाज के बालकों को संस्कारित करना, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना और विकास की गति को तेज करना आज की आवश्यकता है। उन्होंने एनसीईआरटी आधारित शिक्षा तथा मूल्यों के समावेश पर भी बल दिया।
मंच संचालन गया विभाग के विभाग प्रमुख उमाशंकर पोद्दार ने किया। इस अवसर पर समस्त अतिथियों को पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में एकल गीत “वसुधरा परिवार हमारा” की प्रस्तुति दी गई, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहना के साथ सुना।