लाखों नागरिकों की आपत्तियाँ दर्ज, लेकिन चुनाव आयोग ने गंभीरता से नहीं लिया
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस पार्टी ने बड़ा आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस की वोटर अधिकार यात्रा राज्य के 25 जिलों से होकर पटना पहुंची है और इसी दिन आपत्तियाँ दर्ज करने की अंतिम तिथि भी थी। इस दौरान कांग्रेस और इंडी गठबंधन के बूथ लेवल एजेंट्स ने लाखों नागरिकों की आपत्तियाँ दर्ज कराईं, लेकिन चुनाव आयोग ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया।
खेड़ा ने खुलासा किया कि पार्टी की जांच में 243 विधानसभा क्षेत्रों के 90 हजार बूथों पर करीब 89 लाख विसंगतियाँ सामने आईं। इनमें से 65 लाख नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। आयोग ने इसके पीछे पलायन, मृतक, अनुपस्थित और दोहरे पंजीकरण जैसे कारण बताए, परंतु जाँच में कई गंभीर तथ्य मिले। उदाहरणस्वरूप—20,368 बूथों पर 100 से अधिक नाम काटे गए, 7,613 बूथों पर 70% से अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए और 7,931 बूथों पर मृतक श्रेणी में गड़बड़ी मिली। कई जगह जिंदा लोगों को मृतक दिखा दिया गया। अनुपस्थित श्रेणी में भी हजारों वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए। कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया महिलाओं, गरीबों और हाशिये पर खड़े समाज के लोगों को निशाना बनाकर उनके वोटिंग अधिकार छीनने की सोची-समझी साजिश है। खेड़ा ने मांग की कि चुनाव आयोग घर-घर जाकर सत्यापन करे और हर वैध मतदाता का नाम बहाल करे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग ने आनन-फानन में यह प्रक्रिया पूरी की है और आपत्तियों को दरकिनार कर रही है। वहीं, राज्यसभा सांसद व कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने इसे भाजपा प्रायोजित कार्रवाई बताया और कहा कि अब खामियां पूरे देश के सामने हैं।
इस मौके पर विधायक दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे, प्रेमचंद मिश्र, अजीत शर्मा, प्रो. अजय उपाध्याय समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. कांग्रेस का कहना है कि यदि आयोग ही पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाएगा तो लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी और यही सवाल आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव का बड़ा मुद्दा बनेगा।