नवजात शिशुओं के बेहतर इलाज के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत, दूसरे अस्पतालों में भेजने से परिजनों की बढ़ती परेशानी
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिले के सदर अस्पताल में नवजात शिशुओं के गंभीर रूप से बीमार होने पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वेंटिलेटर जैसी जीवनरक्षक सुविधा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में गंभीर नवजातों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। इससे नवजात के परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चे को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहर ले जाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। नवजात शिशुओं का जीवन शुरुआती दिनों में काफी संवेदनशील होता है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों, सांस लेने में परेशानी से जूझ रहे नवजातों और गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचने वाले शिशुओं को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
ऐसी स्थिति में समय पर उपचार, प्रशिक्षित चिकित्साकर्मियों और आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। बता दें कि सदर अस्पताल जिले के बड़ी आबादी के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। यहां शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों से भी मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। प्रसव के बाद नवजात की स्थिति गंभीर होने पर परिजनों को उम्मीद रहती है कि सरकारी अस्पताल में ही बच्चे को आवश्यक उपचार मिल जाएगा लेकिन वेंटिलेटर और नवजातों के लिए जरूरी उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की कमी होने पर मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करना पड़ सकता है। रेफर किए जाने की स्थिति में परिजनों को एंबुलेंस, दूसरे अस्पताल तक पहुंचने और वहां उपचार की व्यवस्था करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। गंभीर नवजातों के मामले में समय पर उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचना विशेष रूप से जरूरी होता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर रूप से बीमार नवजातों के उपचार के लिए नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू), प्रशिक्षित चिकित्सक एवं नर्स, श्वसन सहायता उपकरण, ऑक्सीजन, मॉनिटरिंग मशीन और चौबीसों घंटे चिकित्सा सेवा की आवश्यकता हो सकती है। हर नवजात को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं होती, लेकिन जिन बच्चों को सांस लेने में गंभीर परेशानी होती है, उनके लिए समय पर श्वसन सहायता जीवनरक्षक साबित हो सकती है। अस्पताल में वेंटिलेटर और नवजातों के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
अस्पताल में जरूरी उपकरणों की व्यवस्था के साथ उनके संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती भी महत्वपूर्ण है। केवल मशीन उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका नियमित संचालन, रखरखाव और चौबीसों घंटे प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नवजात शिशु देखभाल इकाई की क्षमता बढ़ाने, गंभीर मरीजों के लिए त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और रेफरल व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर ध्यान देने की जरूरत है। अब सवाल यह है कि सदर अस्पताल में नवजातों के बेहतर उपचार के लिए आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कब ठोस कदम उठाएगा। जिले के लोगों को उम्मीद है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जरूरी सुविधाओं का विस्तार होगा, ताकि गंभीर अवस्था में नवजातों को समय पर उपचार मिल सके और उनके परिजनों को इलाज के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।