नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
सासाराम। सासाराम के शेरशाह महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय ज्ञान परंपरा: अतीत, वर्तमान एवं भविष्य” विषय पर विद्वानों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर अवधूत भगवान राम महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. विनोद कुमार सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता और प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही एक समृद्ध, सतत और वैज्ञानिक विरासत है, जिसमें ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, साहित्य और विविध कौशल समाहित हैं। यह परंपरा वेदों, उपनिषदों, दर्शन, योग, आयुर्वेद और खगोल विज्ञान जैसे प्राचीन स्रोतों पर आधारित है, जो मानव कल्याण, नैतिक मूल्यों और सत्य की खोज पर विशेष जोर देती है।
डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में यह परंपरा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पुनः प्रासंगिक होती जा रही है। प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, विशेषकर गुरुकुल परंपरा, केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह नैतिकता, अनुशासन और चरित्र निर्माण पर भी केंद्रित थी।
उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता और भी बढ़ गई है। यह सतत विकास, कौशल विकास, डिजिटल क्रांति, योग, स्वास्थ्य प्रबंधन और समग्र शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों ने भी भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने और इसे शिक्षा के मुख्यधारा में लाने पर बल दिया।