नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
वैशाली/पटना। कुशल युवा कार्यक्रम (केवाईपी) के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्य पूर्ण करने के बावजूद राज्य के अनेक जिलों में संचालित प्रशिक्षण केंद्रों को अब तक उनका वैध भुगतान नहीं किया गया है। जैसे ही केंद्र संचालकों द्वारा भुगतान की मांग उठाई जाती है, विभाग की ओर से विभिन्न तकनीकी आपत्तियों का हवाला देकर भुगतान प्रक्रिया को लगातार टाला जा रहा है। हाल के दिनों में प्रत्येक जिले में “जाँच” के नाम पर भुगतान रोकने की एक समान प्रवृत्ति सामने आई है, जिससे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
केवाईपी वेलफेयर सोसाइटी, वैशाली के जिलाध्यक्ष आनंद रंजन झा ने कहा कि जाँच की आड़ में केंद्र संचालकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब प्रशिक्षण, उपस्थिति, परीक्षा, पोर्टल एंट्री एवं अन्य सभी औपचारिकताएँ विभागीय नियमों के अनुरूप पूरी की जा चुकी हैं, तो भुगतान रोकने का औचित्य क्या है—यह विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।श्री झा ने गंभीर आशंका जताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कहीं अवैध वसूली की ओर संकेत तो नहीं कर रही है।
विभाग से जुड़े पूर्व मामलों में अनियमितताओं और वसूली के आरोप सामने आ चुके हैं। हाल ही में विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को पाँच लाख रुपये की घूस लेते हुए निगरानी टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़े जाने की घटना ने इन आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। ऐसे में भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि भुगतान में हो रही अनावश्यक देरी के कारण केंद्र संचालक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, किराया और अन्य संचालन व्यय समय पर वहन करना कठिन होता जा रहा है, जिसका सीधा असर प्रशिक्षण व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव प्रदेश के युवाओं के कौशल विकास और भविष्य पर पड़ना तय है।
आनंद रंजन झा ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र लंबित भुगतान जारी नहीं किया गया और जाँच के नाम पर उत्पीड़न की प्रवृत्ति बंद नहीं हुई, तो केवाईपी वेलफेयर सोसाइटी अन्य जिला स्तरीय एवं राज्य स्तरीय संगठनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। साथ ही संबंधित उच्च अधिकारियों एवं सक्षम प्राधिकार के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस महत्वाकांक्षी योजना से जुड़े लंबित भुगतानों को तत्काल जारी किया जाए और केंद्र संचालकों के बीच बनाए जा रहे भय के माहौल को समाप्त किया जाए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक रूप से राज्य के युवाओं तक पहुँच सके।