सरकारी कार्य में बाधा डालने व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के 14 साल पुराने मामले में कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया
विधायक और सांसद ने फैसले को न्याय की जीत बताया, अपर लोक अभियोजक ने कहा- हाईकोर्ट जाएंगे
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। सरकारी कार्य में बाधा डालने व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के 14 साल पुराने मामले में कोर्ट ने भाकपा माले सांसद राजाराम सिंह व पूर्व राजद विधायक वीरेंद्र सिंह समेत सभी 24 आरोपितों को बरी कर दिया है। साक्ष्य के अभाव में तृतीय सह विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट ने काराकाट सांसद और पूर्व विधायक समेत सभी को दोषमुक्त करार दिया। मामला 2 मई 2012 का था।
हसपुरा प्रखंड की सोनहथु पंचायत के मुखिया देवेन्द्र कुमार उर्फ छोटू की हत्या के आक्रोश में विरोध प्रदर्शन किया गया था। कलेक्ट्रेट पहुंचकर नारेबाजी की गई। तत्कालीन सीओ ने सांसद और पूर्व विधायक समेत 24 लोगों पर नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि सीओ समेत कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्हें रोकने का प्रयास किया था। किंतु, प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट में घुसने का प्रयास और हंगामा किया। इससे सरकारी कार्यों में बाधा पहुंचने के साथ-साथ सरकारी संपत्ति को नुकसान भी हुआ। मामले की सुनवाई एमपी एमएलए कोर्ट में चल रही थी। अभियोजन की ओर से 13 गवाही और बचाव पक्ष से 6 से अधिक गवाही हुई थी।

सोमवार को तृतीय सह विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट ने साक्ष्यों का अभाव होने के आधार पर सभी आरोपितों को बरी कर दिया। अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि इस वाद में अभियोजन की ओर से एपीपी कामता प्रसाद सिंह और बचाव पक्ष की ओर से अकमल हसन, क्षितिज रंजन, मुकेश कुमार सिंह, कुणाल सहित अन्य ने भाग लिया। न्यायालय के फैसले पर सांसद राजाराम सिंह और पूर्व विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह ने खुशी जताई है। कहा कि उनको न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था।
सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि यह न्याय की जीत हुई है। इसमें जिन लोगों ने सहयोग किया उनके प्रति वे आभारी हैं। मुखिया की हत्या के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया था। लेकिन, गलत तरीके से प्राथमिकी दर्ज की गई। कोर्ट के फैसले से हौसला बढ़ा है। आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आम आवाम के अधिकार की लड़ाई लड़ते रहेंगे। उधर, अपर लोक अभियोजक कामता प्रसाद सिंह ने कहा कि वे इस फैसले से असंतुष्ट हैं, रिविजन में हाईकोर्ट पटना जाएंगे।