नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
बेतिया। जमाबंदी कायम करते समय संबंधित अधिकारियों और कर्मियों ने सरकारी रिकॉर्ड और रजिस्टर दो को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपर समाहर्ता (एडीएम) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है।
कमेटी को पूरे मामले की जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। अभिलेखों में हेराफेरी कर बेतिया राज की जमीन निजी रैयत के नाम दर्ज की गई थी। जिलाधिकारी ने बताया कि फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों को चिह्नित करने के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही कठोर विभागीय कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
जांच टीम बेतिया राज की जमीन से संबंधित मूल अभिलेखों और जमाबंदी की पूरी प्रक्रिया की गहन पड़ताल करेगी। यह भी देखा जाएगा कि छह एकड़ जमीन की जमाबंदी किस आधार पर और किन दस्तावेजों के सहारे कायम की गई। पूरी प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि किस स्तर पर सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी या नियमों की अनदेखी की गई है।
इधर बैरिया अंचल में भी बंदोबस्ती की गई जमीन के दस्तावेजों से छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आया है। जिलाधिकारी ने इस मामले में भी जांच के बाद सख्त कार्रवाई की बात कही है। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकारी या बेतिया राज की भूमि के अभिलेखों में किसी भी तरह की धांधली बर्दाश्त नहीं होगी। जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।