नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कुटुम्बा में आवासित मूक-बधिर एवं जरूरतमंद बालिकाओं को बिहार शिक्षा परियोजना के सौजन्य से निःशुल्क हियरिंग एड (श्रवण यंत्र) उपलब्ध कराया गया है।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कुटुम्बा में समावेशी शिक्षा के अंतर्गत कुल 25 मूक-बधिर एवं जरूरतमंद बालिकाएं अध्ययनरत हैं। श्रवण एवं वाक संबंधी कठिनाई के कारण इन बालिकाओं को कक्षा में पठन-पाठन, शिक्षक एवं सहपाठियों की बातों को समझने तथा आपसी संवाद में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बालिकाओं को सांकेतिक भाषा के माध्यम से समझने, लिखने एवं सीखने में सहयोग प्रदान किया जाता है।
बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा इन बालिकाओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं एवं श्रवण संबंधी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सभी 25 बालिकाओं को निःशुल्क हियरिंग एड उपलब्ध कराया गया है। औरंगाबाद जिले के समग्र शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी संतोष कुमार द्वारा बालिकाओं को हियरिंग एड प्रदान किया गया।
हियरिंग एड प्राप्त करने वाली बालिकाओं में खुशी कुमारी, अनुराधा कुमारी, सुमन कुमारी, प्रियंका कुमारी, श्वेता कुमारी, प्रियंका कुमारी, निशानी कुमारी, सुरुचि कुमारी, रुचि कुमारी, सोनाली कुमारी, रूपा कुमारी, खुशी कुमारी, निधि कुमारी, हर्षिता कुमारी, प्रियंका कुमारी, प्रियंका कुमारी, इंदु कुमारी, मिष्ठी कुमारी, ब्यूटी कुमारी, रिमझिम कुमारी, मुस्कान कुमारी, प्रिया कुमारी, नेहा कुमारी, निधि कुमारी एवं वंदना कुमारी शामिल हैं।
हियरिंग एड उपलब्ध होने के बाद बालिकाओं के श्रवण अनुभव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कई बालिकाएं कक्षा में शिक्षकों एवं सहपाठियों की बातों को पहले की अपेक्षा बेहतर ढंग से सुन एवं समझ पा रही हैं। इससे शिक्षकों के निर्देशों का पालन करने, सहपाठियों एवं शिक्षकों के साथ संवाद करने तथा कक्षा की गतिविधियों में भागीदारी में सहजता आई है। इसके साथ ही शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है तथा उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।
विद्यालय में अध्ययनरत ये बालिकाएं सुलेख, चित्रकला, रंगोली एवं नृत्य जैसी गतिविधियों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेती हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करती हैं। हियरिंग एड की सुविधा मिलने से इनके लिए सीखने एवं संवाद की प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सहज हुई है।
हियरिंग एड प्राप्त करने वाली एक बालिका ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि अब उसे आवाज सुनने और समझने में पहले की अपेक्षा आसानी होती है। बालिका ने इसे अपने लिए विशेष अनुभव बताते हुए कहा कि यह उसके लिए वरदान से कम नहीं है।
दिव्यांग बालिकाओं को हियरिंग एड उपलब्ध कराया जाना केवल एक उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें शिक्षा, संवाद एवं सामाजिक सहभागिता के अवसरों से और अधिक मजबूती से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर श्रवण क्षमता के माध्यम से इन बालिकाओं को कक्षा में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने तथा अपनी क्षमताओं को विकसित करने में सहयोग मिल रहा है।
विद्यालय परिवार, बालिकाओं एवं उनके अभिभावकों ने इस सहयोग के लिए बिहार शिक्षा परियोजना एवं शिक्षा विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है। यह पहल समावेशी शिक्षा की भावना को मजबूत करने के साथ-साथ दिव्यांग बालिकाओं के आत्मविश्वास एवं सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक प्रयास है।
एक छोटे से श्रवण यंत्र ने इन बालिकाओं के जीवन में सीखने, समझने और संवाद करने के नए अवसर पैदा किए हैं। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि जब तकनीक को संवेदना और समावेशी सोच के साथ जोड़ा जाता है, तो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के जीवन में सार्थक बदलाव लाया जा सकता है।