सरकारी 7.59 एकड़ भूमि का स्वास्थ्य विभाग को निःशुल्क अन्तर्विभागीय हस्तांतरण तथा पातालगंगा न्यास की 12.41 एकड़ भूमि का राज्यपाल, बिहार के नाम निःशुल्क निबंधन
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में देव प्रखंड के पातालगंगा में प्रस्तावित चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण हेतु आवश्यक 20 एकड़ भूमि की उपलब्धता से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए निर्माण की दिशा में मार्ग प्रशस्त किया गया है।
प्रस्तावित चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के लिए चिन्हित कुल 20 एकड़ भूमि में से 7.59 एकड़ सरकारी भूमि का स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के पक्ष में निःशुल्क अन्तर्विभागीय हस्तांतरण की स्वीकृति जिला स्तर से प्रदान की गई है। वहीं, शेष 12.41 एकड़ भूमि, जो पातालगंगा न्यास (ट्रस्ट), देव के अधीन है, का चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण हेतु माननीय राज्यपाल, बिहार के नाम निःशुल्क निबंधन किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री, बिहार द्वारा प्रगति यात्रा के दौरान औरंगाबाद जिले के भ्रमण के क्रम में देव प्रखंड में चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण की घोषणा की गई थी। इसके आलोक में स्वास्थ्य विभाग एवं बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) द्वारा निर्माण कार्य हेतु 20 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसके अनुपालन में देव अंचल अंतर्गत मौजा-चाँदपुर, थाना संख्या-910 में कुल 20 एकड़ भूमि चिन्हित की गई।
चिन्हित भूमि में से मौजा-चाँदपुर, थाना संख्या-910, खाता संख्या-22, खेसरा संख्या-99 में 7 एकड़ 59 डिसमिल गैरमजरूआ मालिक परती कदीम सरकारी भूमि उपलब्ध है। जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना से प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त भूमि को चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण हेतु स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के पक्ष में निःशुल्क अन्तर्विभागीय हस्तांतरण की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इसके साथ ही अंचल अधिकारी, देव को निर्देशित किया गया है कि उक्त भूमि का स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के नाम नामांतरण कराते हुए सीमांकन की कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा संबंधित विभाग को दखल-कब्जा दिलाने की कार्रवाई पूर्ण करें। हस्तांतरित भूमि का उपयोग केवल चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण हेतु निर्धारित प्रयोजन के लिए किया जाएगा। निर्धारित प्रयोजन से इतर उपयोग किए जाने की स्थिति में भूमि संबंधित प्रावधानों के अनुसार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार को वापस हो जाएगी।
शेष 12 एकड़ 41 डिसमिल भूमि मौजा-चाँदपुर, थाना संख्या-910 के खाता संख्या-19, खेसरा संख्या-84 में 1 एकड़ 59 डिसमिल तथा खाता संख्या-22, खेसरा संख्या-06 में 10 एकड़ 82 डिसमिल है। उक्त भूमि वर्तमान में पातालगंगा न्यास (ट्रस्ट), देव के अधीन है तथा संबंधित जमाबंदियां महंत शंकराचार्य जी एवं शिव जी/शंकर जी के नाम से संधारित हैं।
पातालगंगा न्यास समिति, देव द्वारा जनहित में चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण हेतु उक्त 12.41 एकड़ भूमि बिहार सरकार को दान किए जाने तथा राज्यपाल, बिहार के नाम निबंधित किए जाने संबंधी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके पश्चात बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद्, पटना द्वारा भी उक्त भूमि को चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण हेतु निःशुल्क हस्तांतरण/निबंधन किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
1 अक्टूबर 2026 को आयोजित पातालगंगा न्यास समिति की बैठक में भी पूर्व में पारित प्रस्ताव के आलोक में उक्त भूमि को राज्यपाल, बिहार के नाम निःशुल्क निबंधित किए जाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने हेतु सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। साथ ही, न्यास की ओर से आवश्यक निबंधन संबंधी दस्तावेजों के निष्पादन हेतु अधिकृत प्रतिनिधि नामित किया गया।
उक्त के आलोक में अंचल अधिकारी, देव, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, औरंगाबाद एवं अनुमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद के प्रतिवेदन तथा संबंधित विभागों से प्राप्त स्वीकृति के आधार पर 12.41 एकड़ भूमि का चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण हेतु राज्यपाल, बिहार के नाम निःशुल्क निबंधन किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस प्रकार पातालगंगा में प्रस्तावित चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के लिए आवश्यक कुल 20 एकड़ भूमि की उपलब्धता से संबंधित दोनों प्रमुख प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली गई हैं। इनमें 7.59 एकड़ सरकारी भूमि का स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के पक्ष में निःशुल्क अन्तर्विभागीय हस्तांतरण तथा 12.41 एकड़ पातालगंगा न्यास की भूमि का राज्यपाल, बिहार के नाम निःशुल्क निबंधन शामिल है।
प्रस्तावित चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण से औरंगाबाद जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना विकसित होगी। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तथा रोजगार के अवसरों के विस्तार को भी गति मिलने की संभावना है।