बेताब अहमद
रांची। झारखंड की आबोहवा में आज एक गहरी खामोशी और उदासी छाई है। संघर्ष, समर्पण और सादगी की जीवंत मिसाल रहीं दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अर्धांगिनी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आदरणीय माताजी, श्रीमती रूपी सोरेन अब हमारे बीच नहीं रहीं। बुधवार की रात रांची के हिल व्यू अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से झारखंड ने अपने एक ऐसे अभिभावक को खो दिया है, जिन्होंने घर की चारदीवारी से लेकर सुदूर गांवों तक जनजातीय समाज के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
नेमरा की माटी की गोद में अंतिम विदाई
गुरुजी के मोरहाबादी स्थित आवास से जब उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा के लिए रवाना हुआ, तो हर आंख नम थी। आज दोपहर 12 बजे नेमरा के ढेकानाला घाट पर, बिल्कुल उसी स्थान के समीप जहां पिछले साल दिशोम गुरु शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार हुआ था, संथाली रीति-रिवाजों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही है। मां का साया उठने से सोरेन परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। छोटे बेटे और दुमका विधायक बसंत सोरेन के सिंगापुर में इलाजत होने के कारण इस घड़ी में उनकी अनुपस्थिति परिवार की पीड़ा को और बढ़ा रही है।
शोक में डूबा राजनीतिक गलियारा
रूपी सोरेन के निधन की खबर मिलते ही झारखंड और देश के राजनीतिक पटल पर शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां के निधन पर शोक जताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि रूपी सोरेन जी के निधन की खबर अत्यंत दुखद है। आदिवासी समाज के लोगों के सशक्तिकरण और कल्याण के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे। हेमंत सोरेन जी, कल्पना सोरेन जी और उनके समस्त परिवारजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संताली भाषा में ट्विट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उनके जनजातीय समाज के प्रति योगदान को याद किया। वहीं, रांची स्थित उनके आवास पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा सहित तमाम दिग्गज नेताओं और गणमान्य लोगों का तांता लगा हुआ है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी इस अपार दुख पर गहरा शोक जताया है।
माता रूपी सोरेन का जीवन इस बात का गवाह था कि कैसे सादगी और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े बदलाव की नींव रखी जाती है। आज जब उन्हें नेमरा की माटी में सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है, तो पूरा झारखंड नम आंखों से अपनी ‘मां’ को आखिरी जोहार और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को यह आघात सहने की शक्ति दे।