नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। बिहार में नियोजित शिक्षकों की प्रोन्नति और वेतन विसंगति का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ता दिख रहा है। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव और पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने सीएम सम्राट से मुलाकात की है। उन्होंने सीएम सम्राट को एक ज्ञापन भी सौंपा है। शिक्षक नेता ने राज्य सरकार से शिक्षकों को प्रोन्नति का लाभ देने के साथ-साथ पूर्व की सेवा और अर्जित वार्षिक वेतनवृद्धि को वेतन निर्धारण में शामिल करने की मांग की है।
सीएम से मिलकर शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों को प्रोन्नति और वेतनमान को लेकर बड़ी घोषणा की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इसी को लेकर पूर्व सांसद और बीएसटीए के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने सीएम को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की विभिन्न मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। सीएम से मिलकर शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्य के कई शिक्षक 20 वर्षों से अधिक समय से किसी प्रकार की प्रोन्नति से वंचित हैं। ऐसे में प्रोन्नति का लाभ तभी सार्थक होगा, जब पूर्व की सेवा की गणना करते हुए पहले से प्राप्त वार्षिक वेतनवृद्धि को मूल वेतन में जोड़कर वेतन का निर्धारण किया जाए।
पूर्व सांसद सह शिक्षक नेता ने मांग की है कि शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, प्रधानाध्यापक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को राज्यकर्मी के रूप में वेतन निर्धारण करते समय उनकी पूर्व की सेवा अवधि और पूर्व में प्राप्त वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाए। इसके बाद विशिष्ट शिक्षक या विद्यालय अध्यापक नियमावली के तहत आठ वर्ष की सेवा पूरी होने की तारीख से उच्चतर पद पर प्रोन्नति का लाभ देने की मांग की गई है।
शिक्षकों के लिए राज्यकर्मियों की तरह एमएसीपी की सुविधा लागू करने की भी मांग भी उन्होंने सीएम सम्राट से की है। इसके तहत 10 वर्ष, 20 वर्ष और 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर प्रोन्नति का लाभ सुनिश्चित करने की बात कही गई है। सीएम को सौंपे ज्ञापन में सातवें वेतन संरचना के तहत शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों और प्रधानाध्यापकों के वेतन निर्धारण का मुद्दा भी उठाया गया है। साथ ही विभिन्न श्रेणी के शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों और प्रधानाध्यापकों का मूल वेतन 25,000, 28,000, 31,000, 32,000 और 35,000 रुपये है. पत्र में दावा किया गया है कि यह अन्य राज्यकर्मियों को मिल रहे सातवें वेतनमान के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर शिक्षकों के लिए लेवल-07 में 49,900 रुपये, लेवल-08 में 47,600 रुपये और प्रधानाध्यापकों के लिए लेवल-09 में 53,100 रुपये के वेतन निर्धारण की मांग की गई है।
शिक्षक नियोजन नियमावली 2020 और पूर्व की नियमावलियों का हवाला देते हुए राजकीय, राजकीयकृत और परियोजना विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों को प्रोन्नति के जरिए भरने की मांग भी की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने से पिछले चार वर्षों से कार्यरत कर्मियों के बीच बनी वेतन विसंगति को दूर किया जा सकता है। साथ ही शिक्षकों में उत्साह बढ़ेगा और वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पहले की तरह निष्ठा और उत्साह के साथ अपनी भूमिका निभा सकेंगे।