नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। कैसे हर बार चुनाव आते ही शिक्षकों के सामने ट्रांसफर का लॉलीपॉप लटका दिया जाता है और आचार संहिता का बहाना बनाकर उनकी उम्मीदों के साथ खिलवाड़ किया जाता है। बिहार में शिक्षकों का तबादला अब शिक्षा विभाग का काम नहीं, बल्कि चुनावों का ‘मौसम विभाग’ बन चुका है। चुनाव आते ही हवा में ट्रांसफर की उम्मीदें तैरने लगती हैं और आचार संहिता की आंधी आते ही वे फिर हवा हो जाती हैं!
इसमें उन शिक्षकों के परिवारों, रोजमर्रा के संघर्ष और उनके मानसिक तनाव को केंद्र में रखा जाता है जो सालों से अपने गृह जिले से दूर नौकरी कर रहे हैं। घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की राह देख रहे लाखों शिक्षक एक बार फिर मायूस हैं। ‘मनचाही पोस्टिंग’ का सपना देख रहे इन शिक्षकों के लिए बार-बार बदलती तारीखें सिर्फ एक प्रशासनिक तारीख नहीं, बल्कि उनके सब्र की कठिन परीक्षा है। बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के तहत आवेदन करने वाले करीब 6 लाख शिक्षकों की राह एक बार फिर एमएलसी चुनाव की आचार संहिता ने रोक दी है। ई-शिक्षा कोष पोर्टल के आंकड़ों और विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अब नवंबर के दूसरे सप्ताह तक ही प्रक्रिया के आगे बढ़ने के आसार हैं।
जानकारी के मुताबिक, आदर्श आचार संहिता 31 अक्टूबर तक लागू रहने के कारण प्रक्रिया प्रभावित है। इसके बाद विभागीय स्तर पर काम आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, सामान्य स्थानांतरण के लिए आवेदन का नया चरण नवंबर के दूसरे सप्ताह से पहले शुरू होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। हालांकि, यदि जिला और प्रमंडल स्तर पर लंबित काम तेजी से पूरा होता है, तो सात नवंबर से आवेदन लेने की संभावना बन सकती है। यह संभावित समयसीमा है, अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम नहीं।
बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के तहत शिक्षकों ने अपने पसंदीदा स्थान पर पोस्टिंग के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किया है। शिक्षा विभाग के ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 71,151 सरप्लस शिक्षकों ने ऐच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। वहीं, राज्य में सरप्लस शिक्षकों की कुल संख्या करीब 1.60 लाख बताई जा रही है। शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि उन्हें गृह पंचायत या अपने घर के नजदीक के स्कूलों में तैनाती का अवसर मिले। कई शिक्षक लंबे समय से अपने गृह जिले से दूर नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में मनचाही जगह पर स्थानांतरण उनके लिए पारिवारिक जिम्मेदारियों और रोजमर्रा की परेशानियों से राहत पाने का जरिया है।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य के 26 जिलों में इंट्रा-डिस्ट्रिक्ट सरप्लस ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इन जिलों के करीब 42 हजार अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में पदस्थापित किया जा चुका है।हालांकि, शेष 12 जिलों में जिला स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने की बात सामने आई है। इन जिलों में काम पूरा होने के बाद प्रमंडल स्तर पर स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। शिक्षकों को आवंटित जिलों में स्कूल मिलने और अंतिम स्थानांतरण पत्र जारी होने के बाद ही संबंधित चरण पूरी तरह संपन्न माना जाएगा।बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली के तहत प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी की जानी है।पहले चरण में जिले के भीतर सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है। इसके बाद प्रमंडल स्तर पर स्थानांतरण होगा, जिसमें संबंधित प्रमंडल के अंतर्गत जिलों में शिक्षकों को स्कूल आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद राज्य स्तर पर तबादले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस चरण में एक प्रमंडल से दूसरे प्रमंडल में जाने की इच्छा जताने वाले शिक्षक शामिल होंगे।इन चरणों के पूरा होने के बाद स्कूलवार रिक्तियों की सूची जारी की जाएगी। इसके आधार पर सामान्य स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए जाने हैं। इसीलिए जिला और प्रमंडल स्तर की लंबित प्रक्रिया पूरी होना सामान्य तबादले का रास्ता साफ करने के लिए जरूरी है।
शिक्षकों के लिए आपसी सहमति से स्थानांतरण यानी म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया भी इंतजार में है। बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के पहले चरण में ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर इसके लिए 4,259 आवेदन किए गए हैं।इस व्यवस्था के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले शिक्षक आपसी सहमति के आधार पर एक-दूसरे की जगह स्थानांतरण चाहते हैं। लेकिन चुनावी पाबंदियों और अन्य लंबित प्रक्रियाओं के कारण इन आवेदकों को भी अंतिम निर्णय का इंतजार करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से अब तक स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए तीन बार आधिकारिक कार्यक्रम जारी किए जाने की बात सामने आई है।जुलाई 2026 में नियमावली अधिसूचित होने के बाद विभाग ने तीन चरणों में प्रक्रिया पूरी करने का प्रारंभिक कार्यक्रम जारी किया था। इसमें 29 जुलाई से आवेदन और सितंबर में सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात थी।इसके बाद बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति के कारण पहले चरण का काम प्रभावित होने की जानकारी दी गई। विभाग ने फिर चार से 10 अक्टूबर 2026 तक सामान्य स्थानांतरण के लिए आवेदन लेने का नया कार्यक्रम निर्धारित किया। लेकिन चुनाव की तारीखों की घोषणा और आदर्श आचार संहिता लागू होने से प्रक्रिया फिर प्रभावित हो गई।