बेताब अहमद
लखीसराय। राजकीय पुरातात्विक स्थल बालगुदर टीले की सुरक्षा दांव पर है। चारदीवारी होने के बावजूद वहां मवेशी बांधने और अनधिकृत रूप से मिट्टी की कटाई का कार्य जारी है। हाल ही में हुई मिट्टी की खुदाई के दौरान 10वीं-11वीं शताब्दी की भगवान ऋषभनाथ और अग्नि देव की दुर्लभ प्रतिमाएं सतह पर आ गईं। गनीमत रही कि कुछ बच्चों की नजर इन पर पड़ी और इन्हें संग्रहालय सुरक्षित पहुंचा दिया गया, वरना यह अमूल्य ऐतिहासिक साक्ष्य हमेशा के लिए नष्ट हो जाते।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लखीसराय के बालगुदर टीले पर खेल रहे कुछ बच्चों की सतर्कता ने इतिहास के एक अनमोल पन्ने को नष्ट होने से बचा लिया। शिवम, दिलखुश, मोहित, शुभम, ऋषभ और सुमित नामक बच्चों ने मिट्टी की कटाई के दौरान मिली भगवान ऋषभनाथ और अग्नि देव की प्राचीन खंडित प्रतिमाओं को न सिर्फ पहचाना, बल्कि तुरंत राजकीय संग्रहालय पहुंचाकर अद्भुत नागरिक कर्तव्य का परिचय दिया। संग्रहालय कर्मियों और तकनीकी सहायक राजेश कुमार की देखरेख में प्रतिमाओं की सफाई कर प्रारंभिक जांच की गई। पहली प्रतिमा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ की है, जिसका माप 27.4 × 28 × 8 सेंटीमीटर है। दूसरी प्रतिमा पौराणिक देवता अग्नि देव की है, जिसका माप 14.5 × 9.2 × 6.1 बताया जा रहा है।
बच्चों का यह कदम समाज के लिए एक मिसाल है कि कैसे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक धरोहर को लेकर जागरूक हो सकती है। राजकीय पुरातात्विक स्थल बालगुदर टीले की सुरक्षा दांव पर है। चारदीवारी होने के बावजूद वहां मवेशी बांधने और अनधिकृत रूप से मिट्टी की कटाई का कार्य जारी है। हाल ही में हुई मिट्टी की खुदाई के दौरान 10वीं-11वीं शताब्दी की भगवान ऋषभनाथ और अग्नि देव की दुर्लभ प्रतिमाएं सतह पर आ गईं। गनीमत रही कि कुछ बच्चों की नजर इन पर पड़ी और इन्हें संग्रहालय सुरक्षित पहुंचा दिया गया, वरना यह अमूल्य ऐतिहासिक साक्ष्य हमेशा के लिए नष्ट हो जाते। बच्चों ने बिना देर किए दोनों प्रतिमाओं को राजकीय संग्रहालय कार्यालय पहुंचाया और तकनीकी सहायक राजेश कुमार को सौंप दिया। प्रशासन को इस ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।
इनमें जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ और अग्नि देव की प्रतिमा शामिल है। स्थानीय बच्चों की सूचना पर इन्हें राजकीय संग्रहालय के सुपुर्द कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच के बाद संग्रहालय प्रशासन ने इन्हें सुरक्षित रख लिया है, लेकिन टीले पर हो रही अवैध कटाई और अतिक्रमण ने पुरातात्विक संरक्षण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।