नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
समस्तीपुर। दिनभर पसीना बहाकर चंद रुपये कमाने वाले एक मजदूर के लिए उसका घर ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी और सुकून की जगह होती है। लेकिन समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड की मूसापुर पंचायत (वार्ड 10) में शनिवार की शाम जो कुछ हुआ, उसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को पल भर में राख के ढेर में बदल दिया। रसोई गैस सिलेंडर में हुए एक भीषण विस्फोट ने न सिर्फ दो घरों को उजाड़ दिया, बल्कि जीवन और मौत से जूझ रहे एक बेबस पिता को अस्पताल के बिस्तर पर पहुंचा दिया।
थककर लौटे थे घर, पर नियति को कुछ और मंजूर था
पेशे से मजदूर 40 वर्षीय विनोद राय हर दिन की तरह शनिवार की शाम करीब पांच बजे मजदूरी करके घर लौटे थे। दिनभर की थकान के बाद वे अभी सुस्ता ही रहे थे कि रसोई घर से आ रही एक आहट ने उन्हें वहां खींच लिया। घर में शाम के भोजन की तैयारी चल रही थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वहां मौत का सामान (गैस रिसाव) उनका इंतजार कर रहा है। जैसे ही विनोद रसोई में गए, अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि विनोद को संभलने या बाहर भागने का मौका तक नहीं मिला और वे गंभीर रूप से झुलस गए।
चीख-पुकार के बीच जागा ग्रामीणों का हौसला
धमाके की आवाज इतनी भयानक थी कि पूरा मोहल्ला दहल उठा। चारों तरफ चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। लेकिन इस संकट की घड़ी में ग्रामीणों ने गजब का साहस दिखाया। एक तरफ जहां लोग आग बुझाने और फायर ब्रिगेड को सूचना देने में जुटे, वहीं दूसरी तरफ झुलसे हुए विनोद राय को लपटों के बीच से बाहर निकाला गया। दमकल कर्मियों की मुस्तैदी से आग को आगे बढ़ने से तो रोक लिया गया, लेकिन तब तक विनोद राय और शिवानंद राय का सबकुछ तबाह हो चुका था।
अब दाने-दाने को मोहताज हुआ परिवार
इस हादसे ने पीड़ितों को जीवन के सबसे कठिन मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अगलगी की इस विभीषिका में कपड़े, अनाज, बर्तन, बिस्तर, फर्नीचर और गाढ़े पसीने की कमाई (नकदी) सब कुछ जलकर खाक हो चुका है। जिस परिवार के पास कल तक अपना एक आशियाना था, आज वह खुले आसमान के नीचे रहने और दाने-दाने के लिए दूसरों पर निर्भर होने को मजबूर है। प्रशासन भले ही नुकसान के कागजी आकलन में जुटा है, लेकिन पीड़ित परिवारों की सूनी आंखें सरकार और समाज से तुरंत मदद की गुहार लगा रही हैं। अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे विनोद राय और उनके परिवार को इस वक्त केवल सांत्वना की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक मदद की जरूरत है।