नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
समस्तीपुर। रिश्तों की डोर जब लालच के आगे टूट जाए, तो इंसानियत खुद शर्मसार हो जाती है। समस्तीपुर के बंगरा थाना क्षेत्र में जो हुआ, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि भौतिक मोह किस तरह अपनों की जान का दुश्मन बन सकता है। जमीन के एक टुकड़े के विवाद में जिस बेटे ने अपने 70 वर्षीय बुजुर्ग पिता भाग्य नारायण राय को लाठियों से पीटकर मौत के घाट उतारा, उसने न सिर्फ एक जीवन लिया, बल्कि एक पिता और पुत्र के पवित्र रिश्ते की बुनियाद को भी झकझोर दिया। इस घटना ने पूरे गौसपुर सरसौना गांव की आंखें नम कर दी हैं। मृतक की पहचान गौसपुर सरसौना निवासी 70 वर्षीय भाग्य नारायण राय के रूप में हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की रात पारिवारिक जमीन के बंटवारे और मिल्कियत को लेकर पुत्र गौचरण राय ने अपने पिता के साथ तीखी बहस शुरू की। गाली-गलौज से शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा। गुस्से में अंधा होकर कलयुगी पुत्र ने अपने लाचार और बुजुर्ग पिता पर लाठी-डंडों से अंधाधुंध हमला बोल दिया। आरोपी बेटे ने बुजुर्ग पिता को जमीन पर पटककर इस कदर पीटा कि वह लहुलुहान होकर अचेत हो गए। चीख-पुकार सुनकर दौड़े परिजनों और पड़ोसियों ने बीच-बचाव किया और गंभीर हालत में बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सूचना मिलते ही बंगरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्यारे बेटे गौचरण राय को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए बुजुर्ग के शव को पोस्टमार्टम के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल भेज दिया है। थानाध्यक्ष पंचम कुमार ने बताया कि पारिवारिक व जमीनी विवाद में मारपीट के दौरान एक बुजुर्ग की मौत हुई है। आरोपी पुत्र को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस दर्दनाक घटना से मृतक के घर में कोहराम मचा है, वहीं गांव के लोग आरोपी की इस अमानवीय करतूत से स्तब्ध और आक्रोशित हैं
आज के दौर में भौतिक संपत्ति इंसानी जज्बात और रिश्तों पर भारी पड़ती जा रही है। समस्तीपुर की यह घटना महज एक मर्डर केस नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और पारिवारिक संवेदनाओं के पतन का आईना है। जिस उम्र में बेटे को अपने बुजुर्ग पिता की लाठी बनना चाहिए था, उसी उम्र में लालच में आकर उसने पिता पर लाठियां भांज दीं। कानून अपना काम कर रहा है और आरोपी बेटा सलाखों के पीछे है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रह जाता है कि माटी के चंद टुकड़ों के लिए अपनों का खून बहाने की यह मानसिकता समाज में किस दिशा में बढ़ रही है?