एपिकॉन 2026 : दूसरे दिन आधुनिक चिकित्सा और एआई पर केंद्रित रहा विशेषज्ञों का मंथन
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के इस दौर में स्वस्थ रहना किसी चुनौती से कम नहीं है। संतुलित आहार, नियमित टहलना, योग और व्यायाम आज केवल विकल्प नहीं, बल्कि जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। सही मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर भोजन शरीर को ऊर्जा देता है, जबकि रोजाना की सैर और योग मन को स्थिरता और शरीर को सक्रिय बनाए रखते हैं। अनुशासित दिनचर्या न केवल बीमारियों से बचाव करती है, बल्कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी जीवनशैली जनित बीमारियों के जोखिम को भी कम करती है। स्वस्थ जीवनशैली ही दीर्घायु और बेहतर जीवन की सबसे मजबूत नींव है। ये बाते बिहार की राजधानी में आयोजित एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया के 81वें राष्ट्रीय महासम्मेलन ‘एपिकॉन 2026’ के दूसरे दिन देश-विदेश के विख्यात चिकित्सकों ने कही।

विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, उभरती चुनौतियों और तकनीक के समन्वय पर डॉक्टरों ने विस्तार से चर्चा की। बापू सभागार और ज्ञान भवन में आयोजित विभिन्न सत्रों में मानवता और चिकित्सा से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तक के विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन के दूसरे दिन के पहले सत्र की शुरुआत में चिकित्सा के क्षेत्र में मानवता के महत्व को रेखांकित करते हुए देश के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी ने कहा कि मेडिकल प्रैक्टिस केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए। एक डॉक्टर का दायित्व मरीज को सिर्फ शारीरिक राहत देना ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संबल प्रदान करना भी है। डॉ. रेड्डी ने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ करुणा, संवेदना और नैतिक मूल्यों का समावेश ही चिकित्सकीय पेशे को को पूर्ण बनाता है। वहीं एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में कोलकाता के डॉ. ज्योतिर्मय पाल ने सफलता की मास्टर चाबी: एआई या क्लिनिकल जजमेंट विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि भविष्य की चिकित्सा में तकनीक सहायक तो हो सकती है, लेकिन डॉक्टर का क्लिनिकल अनुभव और निर्णय ही सर्वोपरि रहेगा।

हृदय रोग, मधुमेह और जीवनशैली की चुनौतियां
ग्लोबल फोरम और गेस्ट लेक्चर्स के दौरान हृदय और मेटाबॉलिक रोगों पर गंभीर विमर्श हुआ। तेलंगाना के डॉ. पी. गंदैया ने इंटरमिटेंट फास्टिंग के स्वास्थ्य लाभ गिनाए। श्रीलंका के डॉ. सुरंगा मानिलगामा ने खराब नींद और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच संबंध को उजागर किया, जबकि डॉ. अरविंद दुरुवसल ने स्क्रीन टाइम और तनाव को युवाओं में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की दूसरी लहर बताया। नेपाल के डॉ. रत्नमणि गजुरेल ने हिमालयी क्षेत्रों में हार्ट अटैक के प्रबंधन की चुनौतियों पर बात की। वहीं डॉ. संतोष पात्रा ने हार्ट फेल्योर में आयरन थेरेपी की भूमिका स्पष्ट की।

विशिष्ट व्याख्यान और सम्मान
सम्मेलन में प्रेसिडेंशियल ओरेशन के तहत एपीआई के अध्यक्ष प्रो. जी. नरसिम्हुलु ने रुमेटॉयड आर्थराइटिस: अतीत, वर्तमान और भविष्य पर अपना शोध प्रस्तुत किया। ‘नेताजी ओरेशन’ में डॉ. अलकेंदु घोष ने एसएलई रोग की चुनौतियों पर चर्चा की। इसके अलावा डॉ. एस. अनुराधा ने एचआईवी महामारी के विकास और डॉ. मंतोष पांजा ने पीसीआई के जटिल मामलों पर अपने विचार रखे।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा के आदान-प्रदान पर जोर रहा। नेपाल के डॉ. रॉबिन मास्के ने थायराइड और मधुमेह के दोहरे खतरे पर जानकारी साझा की। वहीं मलेशिया के डॉ. पारस दोषी ने डॉक्टरों के लिए क्लिनिकल निर्णय लेने में लंग अल्ट्रासाउंड की उपयोगिता बताई। इंडोनेशिया के डॉ. सैली ने कैंसर थेरेपी के कारण होने वाली हृदय संबंधी जटिलताओं पर व्याख्यान दिया।

संक्रामक रोग और नई औषधियां
एक विशेष सत्र में डॉ. नंदिनी चटर्जी ने एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस को अगली वैश्विक आपात स्थिति करार देते हुए आगाह किया। वहीं डॉ. केतन मेहता ने आधुनिक बुखार प्रोटोकॉल में डॉक्सीसाइक्लिन दवा की भूमिका पर पुनर्चर्चा की। टाइफाइड के बढ़ते मामलों और एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव पर भी ओडिशा के डॉ. रंजन सेन ने महत्वपूर्ण डेटा साझा किया। सम्मेलन के दौरान किडनी रोगों (नेफ्रोलॉजी), हार्मोनल बदलाव (एंडोक्राइनोलॉजी) और संक्रामक रोगों के निदान के लिए क्लिनिकल संकेतों पर भी गहन विमर्श हुआ, जिससे युवा चिकित्सकों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला।
इन बीमारियों पर रहा फोकस
सम्मेलन में मधुमेह, हृदय रोग, संक्रमण, लीवर रोग, न्यूरोलॉजी, रुमेटोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, जेरियाट्रिक मेडिसिन, थायरॉयड, एड्रिनल डिजीज पर विशेष फोकस रहा। वहीं डायबिटीज मेलिटस पर विशेष फोकस देखने को मिला। विशेषज्ञों ने असिम्पटोमैटिक कोरोनरी आर्टरी डिजीज की स्क्रीनिंग, सेमाग्लूटाइड की भूमिका, साप्ताहिक बनाम दैनिक उपचार रणनीतियों, बीटा सेल डि-डिफरेंशिएशन, एपिजेनेटिक बदलाव, सरकोपेनिक ओबेसिटी और टाइप थ्रीसी डायबिटीज जैसे जटिल विषयों पर व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा किया। पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने रियल वर्ल्ड क्लिनिकल चैलेंजेस और उनके समाधान पर जोर दिया। हृदय रोग एवं हाइपरटेंशन सत्रों में भारतीय गाइडलाइंस, युवा मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर, क्रॉनिक कोरोनरी सिंड्रोम, नई एसीएस क्लासिफिकेशन, स्टेमी की बदलती परिभाषा और भारत के पहले स्वदेशी हाइपरटेंशन ट्रायल पर विस्तृत चर्चा हुई। संक्रमण एवं संक्रामक रोगों से जुड़े सत्रों में सेप्सिस के नए बायोमार्कर्स, वायरल फीवर, चिकनगुनिया, डेंगू, स्क्रब टाइफस, रिकेट्सियल संक्रमण, टीबी, कैंडिडेमिया, एचआईवी और एंटीबायोटिक स्टूवर्डशिप जैसे विषयों पर अद्यतन जानकारी दी गई। गर्भावस्था में संक्रमण और श्वसन वायरस पर भी विशेषज्ञों ने विशेष चेतावनी और मार्गदर्शन दिया।
पल्मोनोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर सत्रों में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, पल्मोनरी हाइपरटेंशन, आईसीयू में एंटीकोआगुलेशन और रिफ्रैक्टरी स्टेटस एपिलेप्टिकस जैसे गंभीर विषयों पर गहन चर्चा हुई।सम्मेलन में हेपेटोलॉजी के अंतर्गत लिवर ट्रांसप्लांट, वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम, गर्भावस्था में लिवर रोग और पोर्टल हाइपरटेंशन पर नई अवधारणाएं सामने आईं। न्यूरोलॉजी, रुमेटोलॉजी और जेरियाट्रिक मेडिसिन सत्रों में पार्किन्सनिज्म, न्यूरोसिस्टिसरकोसिस, ऑटोइम्यून रोग, बायोलॉजिक्स, बुजुर्गों में एनीमिया, पॉलीफार्मेसी और मल्टीमॉर्बिडिटी पर चिकित्सकीय दृष्टिकोण साझा किया गया। ऑन्कोलॉजी सत्र में इम्यूनोथेरेपी, कैंसर से जुड़ी थ्रोम्बोसिस और क्रॉनिक मायलॉइड ल्यूकेमिया में हुए नवीनतम शोध और उपचार विकल्पों पर चर्चा की गई। सम्मेलन की एक खास विशेषता यह रही कि चिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेडिकल एथिक्स, सोशल मीडिया का प्रभाव, चिकित्सकों की सुरक्षा, मेडिको-लीगल अधिकार और किफायती चिकित्सा जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाया गया। विशेष व्याख्यानों और ओरशन सत्रों में कोविड-19 एआरडीएस, फंक्शनल डिस्पेप्सिया, पीजे मेहता ओरशन और जीएस साइनानी ओरशन जैसे प्रतिष्ठित सत्रों ने सम्मेलन की अकादमिक गरिमा को और ऊंचाई दी।
डॉक्टरों ने गरीबों के बीच बांटे कंबल, स्वस्थ रहने के टिप्स दिए
अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया चैप्टर की ओर से मुख्य कार्यक्रम से इतर शुक्रवार को गांधी मैदान स्थित रैन बसेरा में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम एवं जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करना एवं ठंड से राहत पहुंचाना था। इस अवसर पर जयपुर से पधारी एसीपी इंडिया चैप्टर की गवर्नर डॉ. स्वाति श्रीवास्तव के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ए. मुरुगनाथन, डॉ. एएन राय, डॉ. केके पारीक, डॉ. संग्राम बिरादर, डॉ. साजिद अंसारी, डॉ. शेर सिंह, डॉ. तपस बंदोपाध्याय सहित अन्य गणमान्य चिकित्सकों ने शिविर में उपस्थित लोगों को विभिन्न रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य संरक्षण एवं जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. स्वाति श्रीवास्तव ने बताया कि एसीपी इंडिया चैप्टर देशभर में गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं, भोजन, वस्त्र, पुस्तकें तथा आत्मनिर्भरता के लिए सिलाई मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता रहा है। इस कार्यक्रम का सफल संयोजन संस्था के वरिष्ठ सदस्य एवं पटना के चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा किया गया।