विपरीत परिस्थितियों में भी करते रहे कांग्रेस की राजनीति
डॉ.उपेंद्र कश्यप
दाउदनगर (औरंगाबाद)। बिहार प्रदेश कांग्रेस ने दादर निवासी अरविंद कुमार शर्मा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। आठ प्रदेश उपाध्यक्षों के नाम की सूची में सबसे ऊपर इनका नाम होना भी महत्वपूर्ण है। उन्हें यह दायित्व देने पर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष रहे राजेश्वर सिंह ने बधाई दी है। श्री शर्मा 1985 से कांग्रेस की राजनीति कर रहे हैं। बीते 41 साल में तमाम तरह के झंझावात झेलने के बावजूद भी वे पार्टी में बने रहे। नतीजा अब उन्हें पार्टी में प्रदेश स्तर पर अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण दायित्व मिला है।
श्री शर्मा ने बताया कि सबसे पहले 1985 में जब वह गया कॉलेज गया में पढ़ रहे थे, तब वे एनएसयूआई में सक्रिय हुए। उन्हें सचिव बनाया गया। यूथ कांग्रेस औरंगाबाद में महामंत्री और कार्यकारी अध्यक्ष बने। प्रदेश महामंत्री तक गए। उसके बाद मुख्य पार्टी कांग्रेस में जिला में डेलीगेट बने। वर्ष 1995 में पार्टी ने उन्हें गोह विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया। वे हार गए। गोह में लगातार परिश्रम करते रहे, लेकिन पार्टी ने 2000 के चुनाव में गोह की जगह ओबरा से प्रत्याशी बना दिया।
इसके बाद 2005 के दोनों चुनाव में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया। वर्ष 2010 में पार्टी ने फिर ओबरा में चुनाव लड़ने के लिए भेजा। तब से लेकर अभी तक मात्र एक बार दाउदनगर अनुमंडल मुख्यालय में राहुल गांधी का कार्यक्रम हुआ है, जो अरविंद शर्मा के प्रयास से हुआ था। इसके बाद वर्ष 2015, 2020 और 2025 में पार्टी ने उन्हें चुनाव नहीं लड़ाया। इसके बावजूद वह कांग्रेस में बने रहे। दो बार प्रदेश महासचिव बने। एआईसीसी (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) में वह सदस्य भी रहे।
उन्होंने बताया कि वह गांधी के विचारधारा को मानते हैं। विधायक और सांसद बनने के लिए चुनावी राजनीति में भी नहीं आए। विचारधारा की राजनीति करते रहे। इसीलिए कांग्रेस के साथ बने रहे। उन्होंने कहा कि पार्टी को जब जो उचित लगा उसने दायित्व दिया। वह इन दायित्वों का निर्वहन करते रहे।