लोकाईंन, भुतही, धोबा, महतमाईन, बाहा और कररुआ जैसी बरसाती नदियों में अब तक जलप्रवाह नहीं
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
दनियावां (पटना)। सावन की तीसरी सोमवारी से हुई तेज बारिश और मघा नक्षत्र के प्रवेश के साथ हुई रिमझिम फुहारों ने धान की खेती करने वाले किसानों को बड़ी राहत दी है। बारिश से खेतों में पर्याप्त जलजमाव हुआ है, जिससे धान की फसल को नई संजीवनी मिली है। हालांकि, क्षेत्र की प्रमुख बरसाती नदियां अब भी सूखी पड़ी हैं, जिससे किसानों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
प्रगतिशील किसान संघ से जुड़े पूर्व आत्मा अध्यक्ष सुनील कुमार (चक्रज्जा), काजीबीघा के मिथिलेश कुमार, सरथुआ के सुनील कुमार, नागेंद्र पटेल, सतीश कुमार, पूर्व प्रमुख ब्रजेश किशोर सिन्हा, खरभैया के संत कुमार मुन्ना, कुंडली के बब्बन सिंह, शाहजहांपुर के झूलन सिंह, हसनपुर के रामनाथ सिंह, दनियावां के जगमोहन यादव, पीरबढौना के वीरेंद्र कुमार सिंह, किसान सलाहकार राजेश रंजन, शिव कुमार चौधरी और प्रवीण कुमार ने बताया कि हालिया बारिश से धान की रोपनी में काफी मदद मिली है। किसान खेतों में यूरिया और पोटाश का प्रयोग कर रहे हैं। बारिश के बाद सूखे की आशंका भी कम हुई है।
किसानों ने बताया कि क्षेत्र की लोकाईंन, भुतही, धोबा, महतमाईन, बाहा और कररुआ जैसी बरसाती नदियों में अब तक जलप्रवाह शुरू नहीं हुआ है। किसानों के अनुसार, इन नदियों में पानी का मुख्य स्रोत फल्गु नदी है, जिसमें पर्याप्त पानी झारखंड के कोडरमा और हजारीबाग के जंगलों में होने वाली अच्छी बारिश पर निर्भर करता है।
किसानों का कहना है कि बरसाती नदियों में उफान नहीं आने और लंबे समय तक सूखा रहने से क्षेत्र के पारंपरिक जलस्रोत आहर, पईन, पोखर, तालाब और कुएं भी सूख गए हैं। नदी में पानी आने से भूजलस्तर में सुधार होता है और स्थानीय मछलियों की आवाजाही भी होती है।
सरथुआ के मुकेश कुमार, संजीव राणा, इंजीनियर विक्कू रंजन, जीवनचक के मुकुल केवट तथा तोप गांव के राजकमल और रणधीर कुमार ने बताया कि नदी में पानी नहीं आने के कारण इचना, पताशी, टेंगरा, चेलक्कर और भंकुरा जैसी स्थानीय मछलियां भी पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
किसानों ने धान की फसल में कीटों के प्रकोप को लेकर भी चिंता जताई। किसान संघ का आरोप है कि पिछले वर्ष से ही ई-कृषि भवन की ओर से समय पर अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाई है। किसानों ने फसल संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कृषि विभाग से सक्रिय सहयोग की मांग की है।
दनियावां प्रखंड की छह पंचायतों के 33 से अधिक राजस्व गांवों में करीब 2,400 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। किसानों के अनुसार, करीब 85 से 90 प्रतिशत क्षेत्र में मुख्य रूप से धान की हाइब्रिड किस्मों की रोपनी की गई है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी जितेंद्र गौरव ने किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि किसान आवेदन देकर अपनी समस्याओं से विभाग को अवगत कराएं, ताकि उनका समाधान कराया जा सके। उन्होंने बताया कि जिला कृषि पदाधिकारी को भी किसानों की समस्याओं की जानकारी दी गई है।
कृषि पदाधिकारी के अनुसार, लोकाईंन नदी के उद्गम स्थल उद्देरस्थान से बैराज के माध्यम से पानी छोड़ने की व्यवस्था की जा रही है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने और बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद क्षेत्र की बरसाती नदियों में जलप्रवाह शुरू होगा। इससे गांवों के पारंपरिक जलस्रोतों के भी फिर से जीवित होने की उम्मीद है।