नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश (नवम) ने दाउदनगर थाना कांड संख्या-299/23 (एसटीआर-557/23 एवं जीआर-227/23) में हत्या के एक चर्चित मामले में दोषी करार दिए गए पिता-पुत्र को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया है कि जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
अपर लोक अभियोजक (एपीपी) राजाराम चौधरी ने बताया कि न्यायालय ने शिवम कुमार एवं उसके पिता रंजीत चंद्रवंशी, दोनों निवासी चौरम, दाउदनगर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद को पीड़ित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।
न्यायालय ने 23 जून 2026 को दोनों अभियुक्तों को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया था। अभियुक्त शिवम कुमार घटना के समय से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस मामले में कुल छह गवाहों की गवाही न्यायालय में कराई गई, जिसके आधार पर अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी माना।
यह था मामला
मामले के वादी नीरज कुमार, निवासी चौरम, दाउदनगर ने 20 मई 2023 को दाउदनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में कहा गया था कि उनकी चाची संजु कुंअर सुबह करीब 5:30 बजे शौच से लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में चापाकल के पास किसी बात को लेकर उनकी शिवम कुमार एवं उसके पिता रंजीत चंद्रवंशी से कहासुनी हो गई।
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर शिवम कुमार ने चाकू से हमला कर दिया, जबकि उसके पिता ने लाठी से मारपीट की, जिससे संजु कुंअर गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान 22 मई 2023 को उनकी मृत्यु हो गई।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों अभियुक्तों को हत्या का दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई।