नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
गया। गयाजी जिला अतिथि गृह सभागार में भारतीय जनता पार्टी जिला पूर्वी कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता संयोजक अशोक गुप्ता ने की। बैठक में कला, संस्कृति, लोक परंपराओं एवं पौराणिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को उनसे जोड़ने पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत है। किसी भी देश की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपराओं, मूल्यों, रीति-रिवाजों और विरासत से होती है। उन्होंने कहा कि बिहार भारत की सांस्कृतिक धुरी है और गया जी उसकी गौरवशाली पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है।
उन्होंने कहा कि गया जी की धरती शिल्प कला, धार्मिक आस्था और पौराणिक धरोहरों से समृद्ध है। यहां की प्राचीन विरासत आज भी जीवंत है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अस्थि कलश भी गया जी में सुरक्षित रखा गया है। मूंगा से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा एवं स्फटिक शिवलिंग जैसे दुर्लभ धार्मिक धरोहर भी गया की सांस्कृतिक समृद्धि के प्रतीक हैं। हाल ही में गया की शिल्प कला को जीआई टैग प्राप्त होना पूरे जिले एवं राज्य के लिए गौरव का विषय है।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि कला एवं संस्कृति का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिहार की लोक संस्कृति, लोक कला, लोक संगीत, नृत्य, अभिनय एवं शिल्प कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संगठित प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए खेल विभाग की तर्ज पर ‘एकलव्य गुरु-शिष्य परंपरा’ के माध्यम से कलाकारों को जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि पारंपरिक कलाओं का संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि बच्चों को कला एवं संस्कृति से जोड़ने के लिए किलकारी जैसे संस्थानों तथा युवाओं को अमरपाली एवं नेहरू युवा केंद्र जैसे मंचों से जोड़कर व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होगी और कला के क्षेत्र में नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार सरकार का उद्देश्य राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है। कला, संस्कृति, पुरातत्व एवं संग्रहालयों के संरक्षण के साथ-साथ गांव-गांव तक सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि सांस्कृतिक विकास की गतिविधियां समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी लोक प्रतिभाओं और गुमनाम कलाकारों की खोज कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
उन्होंने भाजपा कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गया की गौरवशाली सांस्कृतिक एवं पौराणिक धरोहरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें तथा समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं को भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए जनजागरण अभियान चलाएं। इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी और आने वाली पीढ़ियां अपनी सभ्यता एवं संस्कृति पर गर्व कर सकेंगी।
मौके पर मुन्नीलाल, विकास कुमार, करुणा सिंह, सुधीर शर्मा, ऋषभ राज, शंभू प्रसाद, रंजन यादव, सुमित गुप्ता, पिंटू कुमार, रामेश्वर पासवान, ललन चंद्रवंशी, कमलकांत आनंद, बबलू कुमार, दयानंद चंद्रवंशी, विक्की कुमार, धीरज कुमार, धीरेंद्र धीरू, सचिन ठाकुर सहित अन्य मौजूद रहे।