नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
गया। बिहार के गया जिले से निकलकर आईआईटी मद्रास तक का सफर और फिर करोड़ों रुपये के स्टार्टअप की शुरुआत। यह कहानी है दिवांशु कुमार की, जिन्होंने पढ़ाई के दौरान एक ऐसा रोबोट बनाया जो बिना किसी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक में उतारे उसकी सफाई कर सकता है।
आज उनका यही कॉलेज प्रोजेक्ट एक सफल स्टार्टअप बन चुका है और देश के सबसे खतरनाक कामों में से एक को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है। दिवांशु की सफलता यह दिखाती है कि कॉलेज का एक छोटा-सा आइडिया भी लोगों की जिंदगी बदलने वाला बड़ा बिजनेस बन सकता है।
दिवांशु कुमार ने साल 2014 से 2019 तक आईआईटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने प्रोडक्ट डिजाइन में मास्टर्स किया। मास्टर्स की पढ़ाई के दौरान उन्होंने देखा कि भारत में आज भी कई सफाई कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई करनी पड़ती है। यहीं से उनके मन में एक ऐसी मशीन बनाने का विचार आया, जो इंसानों की जगह यह काम कर सके।
दिवांशु ने अपने प्रोफेसर की गाइडेंस में होमोसेप नाम का रोबोट तैयार किया। यह रोबोट सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के लिए बनाया गया था। शुरुआत में यह सिर्फ एक कॉलेज प्रोजेक्ट था, लेकिन आईआईटी मद्रास के एक इनोवेशन कार्यक्रम में इसे काफी सराहना मिली। यहीं से दिवांशु और उनकी टीम ने फैसला किया कि इस तकनीक को लैब से बाहर निकालकर असली दुनिया में इस्तेमाल किया जाएगा।
होमोसेप रोबोट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सफाई कर्मचारी को सीवर या टैंक के अंदर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। इस रोबोट की खास बातें कुछ इस प्रकार है। टैंक के अंदर जमे हुए गंदे और सख्त कीचड़ को ब्लेड की मदद से तोड़ता है। मशीन का सक्शन सिस्टम गंदगी को बाहर खींच लेता है। पूरी सफाई बाहर खड़े होकर ऑपरेट की जा सकती है। इससे जहरीली गैसों और दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाता है। इस तकनीक का उद्देश्य मैन्युअल स्कैवेंजिंग जैसी खतरनाक प्रक्रिया को खत्म करना है।
दरअसल, दिवांशु कुमार ने अपने साथियों के साथ मिलकर Solinas Integrity नाम का स्टार्टअप शुरू किया। यह स्टार्टअप आईआईटी मद्रास के इनक्यूबेशन सेंटर से जुड़ा है। आज दिवांशु इस कंपनी के सीईओ हैं। कंपनी सिर्फ सीवर सफाई वाले रोबोट ही नहीं, बल्कि पानी और सीवर पाइपलाइन की जांच करने वाली रोबोटिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान भी तैयार कर रही है।
कुछ ही वर्षों में Solinas Integrity ने सरकारी एजेंसियों, नगर निकायों और प्राइवेट कंपनियों के साथ काम शुरू कर दिया। कंपनी को इन्वेस्टमेंट भी मिली और अब इसका कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्टअप ने 5 मिलियन डॉलर (करीब 40 करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश जुटाया है और फाइनेंशियल ईयर 2025 में लगभग 15 करोड़ रुपये के आय का लक्ष्य रखा है।
दिवांशु कुमार के होमोसेप प्रोजेक्ट को आईआईटी मद्रास में सर्वश्रेष्ठ मास्टर्स प्रोजेक्ट का पुरस्कार मिला। उन्हें यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदान किया। इसके बाद उनकी पहचान एक युवा इनोवेटर के रूप में देशभर में बनी। साल 2025 में दिवांशु का नाम Forbes India 30 Under 30 की इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग लिस्ट में भी शामिल किया गया
दिवांशु का एंटरप्रेन्योर का सफर होमोसेप से पहले ही शुरू हो गया था। आईआईटी मद्रास में पढ़ाई के दौरान उन्होंने Involve नाम का एक सोशल स्टार्टअप भी शुरू किया था। इसका उद्देश्य स्कूलों में छात्रों को एक-दूसरे से सीखने और पढ़ाने के लिए प्रेरित करना था। यानी दिवांशु हमेशा ऐसी तकनीक और समाधान पर काम करते रहे, जिनका सीधा फायदा लोगों को मिले।