नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
रांची। सीआईडी की एसआईटी ने दिलीप कुमार पासवान को गिरफ्तार किया है, जो परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को आसनसोल के होटलों में ले जाकर लीक प्रश्नपत्र के उत्तर रटवाता था। जुलाई के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह 12वीं गिरफ्तारी है। आरोपी इसके बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लिए गए। दिलीप फिलहाल अंडाल (पश्चिम बंगाल) में रह रहा था, जबकि उसका स्थायी पता मूल रूप से जमुई बिहार का रहने वाला है और अंडाल में छिपकर सिंडिकेट चला रहा था। झारखंड के कई जिलों से लगातार मिल रही शिकायतों और डिजिटल सबूतों के आधार पर सीआईडी अब तक करीब 500 संदिग्धों और अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है।
सीआईडी के अनुसार, वह सिंडिकेट के साथ मिलकर काम कर रहा था और सीजीएल के कई अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का ठेका लिया था। अभ्यर्थियों को गोपनीय ठिकानों और आसनसोल के होटलों में ले जाकर तैयारी कराई जाती थी। तलाशी और तकनीकी जांच में सीआईडी को दिलीप के पास से अभ्यर्थियों के साथ पैसों के भारी लेन-देन के डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य मिले हैं। सीआईडी ने आम लोगों और अभ्यर्थियों से साक्ष्य जुटाने के लिए विशेष ईमेल आईडी, वाट्सएप और मोबाइल नंबर जारी किए थे। अब परीक्षा में शामिल रहे ईमानदार अभ्यर्थी ही नकल, पेपर लीक या सिंडिकेट से जुड़े संदिग्ध सफल अभ्यर्थियों की जानकारी सीआईडी को दे रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, ऐसी सबसे ज्यादा शिकायतें पलामू, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, लातेहार, रामगढ़, देवघर और कोडरमा से आई हैं। शिकायतकर्ताओं ने संदिग्ध अभ्यर्थियों के परीक्षा पूर्व शैक्षणिक रिकॉर्ड, सिंडिकेट से संपर्क और अचानक आए अत्यधिक अंकों से जुड़े विवरण भी दिए हैं। सीआईडी इन सूचनाओं का सत्यापन कर रही है। भूमिका संदिग्ध मिलने पर सफल अभ्यर्थियों को मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की जा रही है। अब तक करीब 500 अभ्यर्थियों और संदिग्धों से पूछताछ हो चुकी है।