इंद्रपुरी जलाशय के लिए महागठबंधन ने खोला मोर्चा, याद दिलाया 1990 का शिलान्यास
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
सासाराम/औरंगाबाद। सोन नदी क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। इंद्रपुरी जलाशय के निर्माण और सोन नहरों के आधुनिकीकरण को लेकर महागठबंधन के नेताओं का प्रयास रंग लाता दिख रहा है। काराकाट सांसद राजाराम सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय निर्माण स्थल का दौरा किया। इस दौरान आसपास के गांवों में ग्रामीणों व किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं और सिंचाई से जुड़ी जमीनी हकीकत को करीब से समझा गया। सांसद राजाराम सिंह ने बताया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी ज्ञापन सौंपा जा चुका है। मुख्यमंत्री की ओर से इस मामले में बेहद सकारात्मक आश्वासन मिला है। उन्होंने अगले बजट में इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए बजटीय प्रावधान करने की बात कही है। इस पहल से पूरे क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी और किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी।
कदवन जलाशय और इंद्रपुरी परियोजना के पूर्ण होने से न केवल खेतों तक पानी पहुंचेगा, बल्कि कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।यह रिपोर्ट केवल एक राजनेता के दौरे की सूचना नहीं देती, बल्कि इसे किसानों के लंबे संघर्ष, उपेक्षा और उनके हक की लड़ाई के रूप में बयां करती है। इसमें यह दर्शाया गया है कि कैसे 35 साल की देरी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और अब इस परियोजना का पूरा होना केवल सिंचाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा है। 35 वर्षों का इंतजार: वर्ष 1990 में रखी गई नींव आज भी फाइलों और अधूरे निर्माण के बीच दम तोड़ रही है, जिससे खेती पूरी तरह मानसून (बारिश) पर निर्भर रह गई है। काराकाट सांसद राजाराम सिंह का यह दौरा महज औपचारिकता नहीं, बल्कि किसानों के दर्द को नजदीक से महसूस करने और उनकी आवाज को शासन-प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाने का प्रयास है। कदवन/इंद्रपुरी जलाशय और सोन नहरों का आधुनिकीकरण न सिर्फ सूखे खेतों को जीवन देगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।

सांसद राजाराम सिंह के नेतृत्व में भाकपा माले के पूर्व विधायक महानंद सिंह, डॉ. अजीत कुशवाहा और आमोद चंद्रवंशी सहित कई दिग्गज नेताओं ने एकजुट होकर आवाज़ उठाई है। सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को साल 1990 का इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि रिहंद और बाणसागर के निर्माण के बाद बिहार के हिस्से का पानी प्रभावित हुआ है। बिहार को अपने डैम की सख्त ज़रूरत है। नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर अगले बजट में इसके लिए ठोस प्रावधान नहीं किया गया, तो किसानों के हक की यह लड़ाई और तेज होगी।
झारखंड से आए किसान नेता कालीचरण मेहता, विनोद सिंह और त्रिलोकी कुमार सहित दर्जनों किसान नेताओं ने इंद्रपुरी जलाशय के निर्माण को खेती-किसानी के लिए जीवन-मरण का सवाल बताया है। सांसदों और नेताओं का कहना है कि दूसरे राज्यों में बांध बनने से हमारी सोन नदी का पानी कम हो गया है। अब समय आ गया है कि बिहार सरकार किसानों के दर्द को समझे और अगले बजट में इस योजना को धरातल पर उतारे ताकि खेतों तक पानी पहुंच सके।