धान-मकई की फसल बर्बाद, वन विभाग पर लापरवाही का आरोप; छह घंटे बाद पहुंचे अधिकारी, मुआवजे का आश्वासन
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
धनबाद। टुंडी प्रखंड के जाताखुटी पंचायत अंतर्गत चरक ढोंगाबेड़ा गांव में करीब 35 जंगली हाथियों के झुंड ने रातभर जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने करीब दर्जनभर घरों को तोड़ दिया और खेतों में खड़ी धान व मकई की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया। हाथियों के हमले में 65 वर्षीय मोती मोहली गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों ने उनका घर तोड़कर उन्हें बाहर निकाला और करीब 200 मीटर तक घसीटने के बाद फेंक दिया। हादसे में उनका पैर टूट गया। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के गांव में घुसने के बाद वन विभाग के अधिकारियों को रातभर फोन किया गया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। स्थानीय निवासी दिनेश सिंह और मुखिया प्रतिनिधि शक्ति हेम्ब्रम ने वन विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।
हालांकि, बीडीओ विशाल पांडेय ने ग्रामीणों का फोन उठाया और प्रशासन की दो गाड़ियों को मौके पर भेजा। वन विभाग की कथित लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। करीब छह घंटे बाद वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा देने और तत्काल राहत उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के आतंक से स्थायी राहत दिलाने और प्रभावित परिवारों को जल्द मुआवजा देने की मांग की है।