बेताब अहमद
सासाराम। अक्सर हम पुलिस की सख्त वर्दी को देखकर उनके भीतर की कोमलता को भूल जाते हैं। सोमवार को सासाराम के शिवसागर प्रखंड में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जो व्यवस्था की तैयारियों के बीच कामकाजी महिलाओं के रोज़मर्रा के संघर्ष की कहानी बयां कर गया। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा और उनकी टीम जब व्यवस्थाएं परख रही थी, तब सुरक्षा वीयू (व्यू) में खड़ी एक महिला पुलिसकर्मी दोहरी जिंदगी जी रही थी। एक मां के लिए अपनी गोद के बच्चे को छोड़कर ड्यूटी पर आना आसान नहीं होता, और जब ड्यूटी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की हो, तो चुनौतियां दोगुनी हो जाती हैं। शोर-शराबे, अधिकारियों की आवाजाही और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह महिला सिपाही पल-पल पर अपनी नजरें बच्चे पर भी टिकाए हुए थी। यह तस्वीर सिर्फ एक ड्यूटी की नहीं है, बल्कि देश की उन लाखों कामकाजी माताओं के त्याग और संघर्ष की गवाह है जो बिना उफ किए अपने दोनों घर और ड्यूटी संभालती हैं।
कहते हैं माँ का आँचल बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित जगह होती है, लेकिन जब वही माँ देश और समाज की सुरक्षा में तैनात हो, तो जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है। सासाराम में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। यहाँ ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिसकर्मी एक हाथ में कानून की जिम्मेदारी और दूसरे हाथ में अपने कलेजे के टुकड़े (बच्चे) को संभाले नजर आईं। वीआईपी सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल और भारी मुस्तैदी के बीच, वह समय निकालकर अपने बच्चे की देखभाल भी कर रही थीं। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हर शख्स की नजरें इस ‘वर्दी वाली माँ’ पर टिक गईं। यह तस्वीर इस बात का जीता-जागता सबूत है कि एक महिला वर्दी पहनकर भी अपने मातृत्व के फर्ज से कभी पीछे नहीं हटती।
उन्होंने यह साबित कर दिया कि महिलाएं न केवल समाज को सुरक्षा दे सकती हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने परिवार और बच्चों को संभाल सकती हैं। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के लिए यह सिर्फ एक सुरक्षाकर्मी की मौजूदगी नहीं थी, बल्कि यह ‘नारी शक्ति’ का जीवंत उदाहरण था जो यह संदेश देता है कि महिलाएं हर मोर्चे पर नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की सुरक्षा का तनाव और दूसरी तरफ बच्चे की फिक्र। यह दृश्य जहां एक ओर उनके जज्बे को सलाम करता है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करता है कि हमारी व्यवस्था में महिला कर्मचारियों के लिए ‘वर्कप्लेस’ (कार्यस्थल) पर शिशु देखभाल जैसी बुनियादी सुविधाएं कब सुलभ होंगी? ताकि किसी माँ को ड्यूटी के दौरान इस तरह मजबूर न होना पड़े।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंगलवार को सासाराम केंद्रीय विद्यालय में होने वाले कार्यक्रम को लेकर सोमवार को तैयारियां अंतिम चरण में रहीं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था से लेकर मंच, बैठने की व्यवस्था और यातायात प्रबंधन तक सभी तैयारियों को पूरा किया गया। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था में जुटी थीं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा, डीडीसी डॉ. आकांक्षा आनंद, एसडीएम प्रिया रानी समेत अन्य पदाधिकारियों ने केंद्रीय विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया।