नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
मसौढी। दशहरा बीतते ही बुधवार को मसौढ़ी के अस्पताल रोड में कुछ अलग ही रंग देखने को मिला। यहां बीते नौ दिनों से विराजी मां दुर्गा की विदाई का दिन था। सुबह से ही पंडाल में भीड़ थी, लेकिन दोपहर होते-होते पूरा माहौल लाल-सिंदूरी हो गया। मौका था सिंदूर खेला का। पंडाल में मौजूद सैकड़ों सुहागिन महिलाओं ने थाल में सिंदूर सजाया और पहले मां के चरणों में अर्पित किया, फिर एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरने लगीं। कोई गाल पर लगा रही थी तो कोई हाथों में। देखते ही देखते हर चेहरा सिंदूर से दमक उठा। बीच-बीच में महिलाएं ढोलक की थाप पर नाचतीं और बोलतीं – “आसचे बोछोर आबार होबे…”
पूर्व वार्ड पार्षद जुली कुमारी ने बताया कि हम लोग मां को बेटी मानते हैं। बेटी जब ससुराल जाती है तो सिंदूर से ही विदा करते हैं। यही परंपरा हम सालों से निभा रहे हैं। एक अन्य युवती ने कहा, विदाई का दुख तो है, पर मां से यही प्रार्थना है कि अगले साल फिर जल्दी आएं।अस्पताल रोड पूजा समिति के आयोजकों ने बताया कि इस बार पूजा में विशेष भीड़ रही। नौ दिनों तक मेला जैसा माहौल रहा। आज विसर्जन से पहले सिंदूर खेला के बाद प्रसाद के तौर पर चाट, जलेबी और मिठाइयां बांटी गईं।
गौरतलब है कि सिंदूर उत्सव बंगाल की परंपरा है, जिसे अब मसौढ़ी जैसे छोटे शहरों में भी महिलाएं पूरे उत्साह से अपना रही हैं। विजयादशमी पर इसे सुहाग की सुख-समृद्धि और मां के सम्मान का प्रतीक माना जाता है। राधा कुमारी, अनिता कुमारीस नमिता कुमारी समेत सैकड़ों महिलाओं ने सिंदूर खेला कर मां को नम आंखों से विदाई की, वही कार्यक्रम में रवि रंजन कुमार उर्फ पप्पू गांधी, अंबर कुमार उर्फ चिंटू, पिंटू रजक समेत कई लोग शामिल रहे।