किसानों ने दिखाई उत्साहपूर्ण भागीदारी
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। कृषि क्षेत्र में स्थायी और सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्राण संस्था के तत्वावधान में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए लगभग 50 किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम में कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी, आत्मा के कृषि तकनीकी प्रबंधक तथा आईआरआईएसईटी से आए वैज्ञानिकों की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया। विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यशाला के दौरान प्राकृतिक खेती और जैविक विकल्पों पर विशेष फोकस रहा। रफीगंज प्रखंड की किसान चांदनी देवी ने रासायनिक उर्वरक यूरिया के स्थान पर “श्री जीवामृत” के उपयोग की विधि विस्तार से बताई। उन्होंने बताया कि गाय का गोबर, गौमूत्र, गुड़, बेसन एवं जीवांश मिट्टी को मिलाकर 72 घंटे तक छायादार स्थान पर तैयार किया जाता है, जिसके बाद इसे सिंचाई के दौरान यूरिया के विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल भी सुरक्षित रहती है।
इसी क्रम में संगीता देवी ने प्राकृतिक कीट नियंत्रण के उपाय “श्री नीमास्त्र” के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह विधि न केवल सस्ती है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है।
कार्यशाला में औरंगाबाद के कर्मा भगवान क्षेत्र की निवासी पुष्पा देवी ने मशरूम की खेती के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों में भी मशरूम उत्पादन शुरू किया जा सकता है और इससे अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। साथ ही उन्होंने मशरूम से बने विभिन्न उत्पादों की जानकारी भी दी, जो किसानों के लिए आय के नए अवसर खोल सकते हैं।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने और जैविक विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के अंत में उपस्थित किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उन्हें नई तकनीकों और वैकल्पिक खेती के तरीकों को समझने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं। किसानों ने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस सफल आयोजन ने जिले में प्राकृतिक खेती की दिशा में एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक किसान इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे।