नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। बुधवार को पटना से लेकर मसौढ़ी अनुमंडल तक दवा कारोबारियों का गुस्सा सड़कों पर दिखा। All India Chemists and Druggists Association के आह्वान पर थोक और खुदरा दवा विक्रेताओं ने 24 घंटे का ऐतिहासिक बंद रखा। मसौढ़ी अनुमंडल की करीब 150 दवा दुकानों पर ताले लटक गए, जिससे पूरे इलाके में दवा बाजार ठप रहा।
बताया जा रहा है कि ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। Bihar Chemists Association के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि कोरोना काल में शुरू हुई ऑनलाइन दवा बिक्री अब नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता का माध्यम बन चुकी है। उनका आरोप है कि एआई जनरेटेड रसीदों और ऑनलाइन ऑर्डरिंग के जरिए युवा नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा है।

दवा कारोबारियों ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। दुकानदारों का कहना है कि ऑफलाइन मेडिकल स्टोरों पर ड्रग लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, निरीक्षण और कई सख्त नियम लागू हैं, जबकि ऑनलाइन कंपनियों को खुली छूट दी जा रही है। केमिस्टों ने मांग की कि या तो ई-फार्मेसी पर भी समान नियम लागू किए जाएं या फिर ऑफलाइन दुकानदारों को भी राहत दी जाए।
बंद के दौरान कारोबारियों ने तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं
-
ई-फार्मेसी को पूर्ण रूप से बंद किया जाए।
-
ऑनलाइन और ऑफलाइन दवा विक्रेताओं पर एक समान कानून लागू हो।
-
नशीली दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर सख्त रोक लगाई जाए।
हालांकि मरीजों की परेशानी को देखते हुए इमरजेंसी सेवाओं के लिए कुछ चुनिंदा दवा दुकानों को खुला रखा गया। इसके बावजूद कई मरीजों और परिजनों को दवाएं लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुकेश कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो यह एक दिन का बंद आगे चलकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पूरे बिहार के केमिस्ट सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।