नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिले के पड़रावां पंचायत के राजा बिगहा गांव की निवासी सरिता देवी ने संघर्ष और मेहनत के बल पर अपनी जिंदगी को नई दिशा देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी पहल की है। पति के असामयिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर आ गई थी और आजीविका चलाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे कठिन समय में उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। इसी दौरान भारत सरकार तथा टाटा ट्रस्ट से पोषित प्राण संस्था की टीम उनके घर पहुंची और उनकी रुचि तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

बातचीत में सरिता देवी ने अपनी स्वयं की नर्सरी स्थापित करने की इच्छा जताई। इसके बाद संस्था की टीम ने उन्हें नर्सरी व्यवसाय के लिए आवश्यक भूमि, पौधों की देखभाल, मेहनत और तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मार्गदर्शन मिलने के बाद सरिता देवी ने स्वयं पौधे खरीदकर नर्सरी की शुरुआत की। लगातार मेहनत, लगन और समर्पण के बल पर उन्होंने अपने छोटे से प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आज उनकी नर्सरी स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण पौधों के लिए पहचान बना चुकी है।
सरिता देवी की नर्सरी की खास बात यह है कि यहां केवल महिलाओं को रोजगार दिया जाता है। इससे आसपास की कई महिलाओं को नियमित काम और आय का अवसर मिला है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। उनकी मेहनत और नर्सरी की गुणवत्ता का ही परिणाम है कि अब वन विभाग ने भी पौधों की आपूर्ति के लिए उनकी नर्सरी से बुकिंग की है। यह उपलब्धि उनके संघर्ष और सफलता की बड़ी पहचान मानी जा रही है।

राष्ट्रीय कृषि विशेषज्ञ एवं प्राण संस्था के प्रमुख अनिल कुमार वर्मा बताते हैं कि आज नर्सरी में विभिन्न प्रकार के हजारों पौधे हैं और इनके माध्यम से वृक्षारोपण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए विशिष्ट पहल की जा रही है। इस कार्य में सरिता देवी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
सरिता देवी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम के बल पर कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी सफलता में बदला जा सकता है। आज वे आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।