छाती भर पानी में रस्सी के सहारे नदी पार करने की मजबूरी, छह गांवों का संपर्क टूटा, बच्चे और महिलाएं सबसे अधिक परेशान
शशि तुलस्यान
मसौढ़ी। अनुमंडल क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश और नदियों में आई बाढ़ ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मसौढ़ी प्रखंड के गुरपतिचक गांव के समीप मोरहर नदी पर बना अस्थायी डायवर्सन बाढ़ के तेज बहाव में बह जाने के बाद करीब छह गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है। आवागमन का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर छाती भर पानी के बीच रस्सी के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के लिए यह रास्ता रोजमर्रा की जिंदगी का अहम जरिया है। स्कूल जाने वाले बच्चे, मजदूरी करने वाले लोग, महिलाएं और अन्य ग्रामीण इसी रास्ते से होकर आते-जाते थे। डायवर्सन टूटने के बाद अब नदी पार करना किसी जोखिम भरे सफर से कम नहीं है। ग्रामीणों ने अपनी सुविधा के लिए नदी के दोनों किनारों के बीच रस्सी बांध रखी है। इसी रस्सी को पकड़कर लोग तेज बहाव के बीच किसी तरह एक किनारे से दूसरे किनारे पहुंच रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मोरहर नदी पर पक्के पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। बारिश का मौसम शुरू होने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया। इसी बीच नदी में अचानक बाढ़ आने से लोगों के आवागमन के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्सन तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। इसके बाद से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी तक आवागमन के लिए कोई स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। मजबूरी में लोग पानी के बीच से होकर नदी पार कर रहे हैं। तेज बहाव के कारण हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब चार दिन पहले नदी पार करने के दौरान एक बच्चा तेज बहाव में बह गया था। हालांकि आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए किसी तरह बच्चे को बचा लिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय और बढ़ गया है। कई महिलाएं भी नदी पार करने के दौरान पानी में गिर चुकी हैं। इसके बाद महिलाओं का इस रास्ते से आना-जाना लगभग बंद हो गया है।
सबसे अधिक परेशानी शाम के समय मजदूरी कर लौटने वाले ग्रामीणों को होती है। दिनभर काम करने के बाद जब लोग घर लौटते हैं, तब नदी का तेज बहाव और कम रोशनी उनके लिए खतरा और बढ़ा देती है।
टूटे डायवर्सन के कारण सुकढीयां, काजीचक, बहादुरगंज, सिकंदरपुर, लहसुना और बदरोई समेत छह गांवों के हजारों लोगों का रोजमर्रा का आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों को बाजार, स्कूल, कामकाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए नदी पार करनी पड़ती है। आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब हो जाए या किसी गांव में कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो वहां एंबुलेंस पहुंचाना मुश्किल है। रात के समय किसी तरह की दुर्घटना या गंभीर समस्या होने पर चारपहिया वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पाएगा।
पंचायत समिति सदस्य धर्मेंद्र रजक ने कहा कि डायवर्सन टूटने के बाद छह गांवों के लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव में अचानक कोई घटना घट जाती है तो एंबुलेंस के पहुंचने का रास्ता नहीं है। रात में किसी ग्रामीण को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े तो वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान कराने की मांग की।
पंचायत समिति सदस्य धर्मेंद्र रजक के अलावा मंटू साव, राजू पासवान, बबलू रजक, उमेश रजक, नाथू सिंह, दिलीप सिंह, साधु पासवान, महेंद्र पासवान समेत अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से डायवर्सन की जल्द मरम्मत कराने अथवा तत्काल वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं की गई तो किसी भी समय बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है। लोगों का कहना है कि जान जोखिम में डालकर नदी पार करना उनकी मजबूरी बन गई है, ऐसे में प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था करनी चाहिए।