नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुनपुन के दो अमर सपूतों शहीद रामगोविंद सिंह और शहीद रामानंद सिंह को मंगलवार को उनके शहादत दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। 1942 की अगस्त क्रांति के दौरान पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के प्रयास में अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों का सामना करते हुए शहीद हुए सात युवाओं में रामगोविंद सिंह और रामानंद सिंह भी शामिल थे। उनकी शहादत की स्मृति में पुनपुन पार्क में स्थापित प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर लोगों ने दोनों वीर सपूतों को नमन किया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मसौढ़ी के एसडीएम धनराज कुमार ने शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर शहीदों के परिजनों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। लोगों ने देश की आजादी के लिए दिए गए उनके बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि 11 अगस्त 1942 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन था। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन की लहर थी। पटना सचिवालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए निकले युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अब भारत की धरती पर अंग्रेजी हुकूमत को अधिक दिनों तक स्वीकार नहीं किया जाएगा।
तिरंगा फहराने के दौरान अंग्रेजी सैनिकों ने युवाओं पर गोलियां चला दीं। सात युवाओं ने अपने सीने पर गोलियां खाकर शहादत दी। इन अमर शहीदों में पुनपुन के रामगोविंद सिंह और रामानंद सिंह भी शामिल थे। वक्ताओं ने कहा कि इन युवाओं ने अपनी जान देकर देश की आजादी की नींव को और मजबूत किया।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि पुनपुन की धरती के लिए यह गौरव की बात है कि यहां के दो सपूतों ने अगस्त क्रांति के दौरान देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। रामगोविंद सिंह और रामानंद सिंह का त्याग आज भी क्षेत्र के लोगों को देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।
वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों की गाथाओं को केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, त्याग और बलिदान से परिचित कराना समाज की जिम्मेदारी है। इतिहास के इन महानायकों की स्मृतियां युवाओं को देश के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराती हैं।
कार्यक्रम के दौरान शहीद रामगोविंद सिंह की 102वीं जयंती के अवसर पर भी उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उपस्थित लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके जीवन और देश के प्रति समर्पण को नमन किया।
वक्ताओं ने कहा कि शहीद रामगोविंद सिंह और रामानंद सिंह ने जिस उम्र में अपने भविष्य के सपने देखने थे, उस समय उन्होंने देश की आजादी को अपना सर्वोच्च लक्ष्य बनाया। तिरंगे के प्रति उनका जुनून और देश के लिए मर-मिटने का जज्बा आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवंत है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने दोनों शहीदों के आदर्शों को आत्मसात करने तथा देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए अपना योगदान देने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि आजादी केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे हासिल करने के लिए जिन लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उनके प्रति सम्मान और उनके आदर्शों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, पटना जिला ग्रामीण अध्यक्ष सहित शहीदों के परिजन मधुसूदन कुमार सिंह, मनीष कुमार, सतगुरु प्रसाद गुप्ता, विनोद सिंह, ओम सिंह, अश्विनी कुमार सिंह, लाल मोहन सिंह, रणजीत पटेल, मसौढ़ी के अनिल कुमार, बराह पैक्स अध्यक्ष अरुण कुमार, सुधीर कुमार सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और देश की आजादी के लिए उनके अमूल्य बलिदान को नमन किया गया। श्रद्धांजलि सभा में “शहीद रामगोविंद सिंह अमर रहें”, “शहीद रामानंद सिंह अमर रहें” तथा “भारत माता की जय” के नारों से वातावरण गूंज उठा।