प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ रही मगध की अनमोल धरोहर, कब जागेगी सरकार?
बेताब अहमद
औरंगाबाद। प्राचीन मगध का गौरवशाली इतिहास आज रफीगंज के पचार पहाड़ी पर आंसू बहा रहा है। प्रखंड मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित यह पहाड़ी अपने शीर्ष पर एक दुर्लभ दो-मंजिला प्राचीन विहार के अवशेष समेटे हुए है। प्रशासनिक उपेक्षा और पुरातात्विक संरक्षण के अभाव में यह अनमोल धरोहर धीरे-धीरे जमींदोज होने की कगार पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते यहाँ व्यापक शोध और खुदाई न हुई, तो हम इतिहास के एक बड़े पन्ने को हमेशा के लिए खो देंगे। क्या हमारी सोई हुई व्यवस्था इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन मानचित्र पर जगह दिला पाएगी?
प्राचीन राजगृह–उरुवेला–सारनाथ मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक पचार पहाड़ी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद इसी मार्ग से सारनाथ गए थे। इतने महत्वपूर्ण बौद्ध कालीन स्थल होने के बावजूद प्रशासन सोया हुआ है। स्थानीय जनता लंबे समय से इसे संरक्षित करने और पर्यटन केंद्र बनाने की मांग कर रही है। यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यहाँ वैज्ञानिक खुदाई और सर्वे कराए, तो इतिहास के कई बड़े रहस्य सामने आ सकते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस धरोहर को बचाए, ताकि क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
यदि पुरातत्व विभाग यहाँ संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं का विकास करता है, तो यह शोधार्थियों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक नया ठिकाना बनेगा। इस कदम से न सिर्फ हमारी प्राचीन संस्कृति को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आर्थिक उन्नति के नए रास्ते भी खुलेंगे।