समाज की मुख्यधारा में लौटने और बेहतर जीवन जीने का दिलाया संकल्प
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मसौढ़ी उपकारा में एक भावुक और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक बहनों ने जेल पहुंचकर 210 बंदियों की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें सकारात्मक जीवन अपनाकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प दिलाया।
जिन बंदियों की कलाई पर लंबे समय से किसी बहन ने राखी नहीं बांधी थी, उनके लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला रहा। राखी बांधने के दौरान कई बंदियों की आंखें नम हो गईं। बहनों ने उन्हें भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का महत्व बताते हुए जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
राखी बांधने के बाद जेल परिसर के मैदान में सभी बंदियों को एक साथ बैठाकर आध्यात्मिक सत्संग एवं प्रवचन का आयोजन किया गया। इस दौरान आध्यात्मिक बहनों ने जीवन के वास्तविक उद्देश्य, गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों, मानव जीवन के महत्व तथा तनावमुक्त रहने के लिए योग और राजयोग के माध्यम से मन को शांत रखने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
ब्रह्माकुमारी बहन आभा रानी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बंदियों के मन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। रक्षाबंधन के दिन किसी की कलाई सूनी न रहे, इसी भावना से हर वर्ष बहनें जेल पहुंचकर बंदियों को राखी बांधती हैं। उन्होंने बंदियों से जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने, दूसरों की मदद करने और समाज में सम्मानजनक पहचान बनाने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है और इसे बेहतर कार्यों में लगाना चाहिए। बंदियों को संकल्प दिलाया गया कि वे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर आगे चलकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी पहचान बनाएंगे।
इस अवसर पर मसौढ़ी जेल के उपाधीक्षक गौतम कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि हर वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनें जेल पहुंचकर बंदियों को राखी बांधती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आध्यात्मिक और प्रेरणादायक कार्यक्रमों से बंदियों के मानसिक एवं नैतिक सुधार में मदद मिलती है और उनके भीतर जीवन के प्रति नई उम्मीद और सकारात्मक सोच विकसित होती है।