लॉ यूनिट के प्राचार्य सहित कई शिक्षक नदारद, स्पष्टीकरण तलब
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
गया। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और अकादमिक अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त कदम उठाते हुए मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने शहर के प्रतिष्ठित ए.एम. कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी इंद्र कुमार सिंह भी मौजूद रहे। कुलपति के अचानक कॉलेज परिसर में पहुंचने से शिक्षकों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान ए.एम. कॉलेज के प्राचार्य तो अपने कक्ष में समय पर उपस्थित मिले, लेकिन कॉलेज के अनेक शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए।
सबसे अधिक निराशाजनक स्थिति कॉलेज परिसर में ही संचालित हो रहे लॉ कॉलेज में देखने को मिली। निरीक्षण के दौरान लॉ कॉलेज के प्राचार्य बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। वहां मौजूद कर्मचारियों ने कुलपति को बताया कि उपस्थिति पंजी प्राचार्य के ही कमरे में रखी है और उस कमरे में ताला जड़ा हुआ है। रजिस्टर बंद होने के कारण वहां उपस्थित कर्मचारी भी अपनी हाजिरी दर्ज नहीं करा सके थे। कर्मचारियों को इस बात की भी कोई जानकारी नहीं थी कि उनके प्राचार्य महोदय कब तक कॉलेज आएंगे।
बिना किसी सूचना के इस तरह की घोर लापरवाही और लेटलतीफी पर कुलपति प्रो. केशरी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए ड्यूटी से गायब सभी शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और विशेष रूप से लॉ यूनिट के प्राचार्य के विरुद्ध स्पष्टीकरण जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने साफ लहजे में हिदायत दी है कि पठन-पाठन और ड्यूटी में किसी भी प्रकार की कोताही व मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों पर विश्वविद्यालय के नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अकादमिक अनुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने कहा कि मगध विश्वविद्यालय वर्तमान में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है और नित्य नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस विकासात्मक यात्रा में अकादमिक अनुशासन और समयबद्धता सबसे अनिवार्य अंग है। शिक्षा के मंदिर में शिक्षकों का समय पर उपस्थित न होना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। कुलपति की इस सख्त कार्रवाई के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अन्य कॉलेजों में भी समय-पालन को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।